30 अक्टूबर 2029 को रियाद का पंचांग

मंगलवार, 30 अक्टूबर 2029, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

मंगलवार, 30 अक्टूबर 2029 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (02:24, 31 अक्टू॰ तक), नक्षत्र पुष्य (21:10 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 05:58 पर और सूर्यास्त 17:14 पर है। राहुकाल 14:25 से 15:49 तक है।

दिन और रात
दिन 05:58 – 17:14
रात 05:59 तक
तिथि
अष्टमी, 02:24 तक
नवमी
नक्षत्र
पुष्य, 21:10 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 अक्टूबर 2029 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 02:24, 31 अक्टू॰ तक
कृष्ण नवमी 01:33, 1 नव॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 21:10 तक
आश्लेषा 21:07, 31 अक्टू॰ तक
योग
साध्य 09:46 तक
शुभ 08:25, 31 अक्टू॰ तक
करण
बालव 14:32 तक
कौलव 02:24, 31 अक्टू॰ तक
तैतिल 14:05, 31 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:58
सूर्यास्त
17:14
चंद्रोदय
23:45
चंद्रास्त
12:16
दिनमान
11h 15m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:17 – 05:08
अभिजीत मुहूर्त
11:14 – 11:59

अशुभ समय

राहुकाल
14:25 – 15:49
यमगंड
08:47 – 10:12
गुलिक काल
11:36 – 13:01

30 अक्टूबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:58 – 07:23टालें
उद्वेग07:23 – 08:47टालें
चर08:47 – 10:12सामान्य
लाभ10:12 – 11:36शुभ
अमृत11:36 – 13:01शुभ
काल13:01 – 14:25टालें
शुभ14:25 – 15:49शुभ
रोग15:49 – 17:14टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:14 – 18:49टालें
लाभ18:49 – 20:25शुभ
उद्वेग20:25 – 22:01टालें
शुभ22:01 – 23:36शुभ
अमृत23:36 – 01:12शुभ
चर01:12 – 02:48सामान्य
रोग02:48 – 04:23टालें
काल04:23 – 05:59टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:5806:55दिन
सूर्य06:5507:51दिन
शुक्र07:5108:47दिन
बुध08:4709:44दिन
चंद्र09:4410:40दिन
शनि10:4011:36दिन
गुरु11:3612:32दिन
मंगल12:3213:29दिन
सूर्य13:2914:25दिन
शुक्र14:2515:21दिन
बुध15:2116:17दिन
चंद्र16:1717:14दिन
शनि17:1418:18रात
गुरु18:1819:21रात
मंगल19:2120:25रात
सूर्य20:2521:29रात
शुक्र21:2922:33रात
बुध22:3323:36रात
चंद्र23:3600:40रात
शनि00:4001:44रात
गुरु01:4402:48रात
मंगल02:4803:52रात
सूर्य03:5204:55रात
शुक्र04:5505:59रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 नव॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 नव॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 नव॰ 2029कार्तिक अमावस्याअमावस्या
9 नव॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 नव॰ 2029वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 नव॰ 2029कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
25 नव॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2737° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।