25 नवंबर 2029 को रियाद का पंचांग

रविवार, 25 नवंबर 2029, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

रविवार, 25 नवंबर 2029 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (14:35 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (02:18, 26 नव॰ तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 06:16 पर और सूर्यास्त 17:03 पर है। राहुकाल 15:42 से 17:03 तक है।

दिन और रात
दिन 06:16 – 17:03
रात 06:16 तक
तिथि
चतुर्थी, 14:35 तक
पंचमी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 02:18 तक
पुष्य
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 नवंबर 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 14:35 तक
कृष्ण पंचमी 15:24, 26 नव॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 02:18, 26 नव॰ तक
पुष्य 03:25, 27 नव॰ तक
योग
शुभ 15:02 तक
शुक्ल 14:31, 26 नव॰ तक
करण
बालव 14:35 तक
कौलव 03:04, 26 नव॰ तक
तैतिल 15:24, 26 नव॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 19:56 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:16
सूर्यास्त
17:03
चंद्रोदय
20:42
चंद्रास्त
09:33
दिनमान
10h 48m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:30 – 05:23
अभिजीत मुहूर्त
11:18 – 12:01

अशुभ समय

राहुकाल
15:42 – 17:03
यमगंड
11:40 – 13:00
गुलिक काल
14:21 – 15:42

25 नवंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:16 – 07:37टालें
चर07:37 – 08:58सामान्य
लाभ08:58 – 10:19शुभ
अमृत10:19 – 11:40शुभ
काल11:40 – 13:00टालें
शुभ13:00 – 14:21शुभ
रोग14:21 – 15:42टालें
उद्वेग15:42 – 17:03टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:03 – 18:42शुभ
अमृत18:42 – 20:22शुभ
चर20:22 – 22:01सामान्य
रोग22:01 – 23:40टालें
काल23:40 – 01:19टालें
लाभ01:19 – 02:58शुभ
उद्वेग02:58 – 04:37टालें
शुभ04:37 – 06:16शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:1607:10दिन
शुक्र07:1008:04दिन
बुध08:0408:58दिन
चंद्र08:5809:52दिन
शनि09:5210:46दिन
गुरु10:4611:40दिन
मंगल11:4012:33दिन
सूर्य12:3313:27दिन
शुक्र13:2714:21दिन
बुध14:2115:15दिन
चंद्र15:1516:09दिन
शनि16:0917:03दिन
गुरु17:0318:09रात
मंगल18:0919:15रात
सूर्य19:1520:22रात
शुक्र20:2221:28रात
बुध21:2822:34रात
चंद्र22:3423:40रात
शनि23:4000:46रात
गुरु00:4601:52रात
मंगल01:5202:58रात
सूर्य02:5804:04रात
शुक्र04:0405:10रात
बुध05:1006:16रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
25 नव॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 नव॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 दिस॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 दिस॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
5 दिस॰ 2029मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
9 दिस॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 दिस॰ 2029धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिस॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 दिस॰ 2029मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
24 दिस॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2747° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।