26 नवंबर 2029 को रियाद का पंचांग

सोमवार, 26 नवंबर 2029, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

सोमवार, 26 नवंबर 2029 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (15:24 तक), नक्षत्र पुष्य (03:25, 27 नव॰ तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 06:16 पर और सूर्यास्त 17:03 पर है। राहुकाल 07:37 से 08:58 तक है।

दिन और रात
दिन 06:16 – 17:03
रात 06:17 तक
तिथि
पंचमी, 15:24 तक
षष्ठी
नक्षत्र
पुष्य, 03:25 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 नवंबर 2029 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 15:24 तक
कृष्ण षष्ठी 15:39, 27 नव॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 03:25, 27 नव॰ तक
आश्लेषा 03:56, 28 नव॰ तक
योग
शुक्ल 14:31 तक
ब्रह्म 13:34, 27 नव॰ तक
करण
तैतिल 15:24 तक
गर 03:36, 27 नव॰ तक
वणिज 15:39, 27 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:16
सूर्यास्त
17:03
चंद्रोदय
21:38
चंद्रास्त
10:15
दिनमान
10h 47m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:31 – 05:24
अभिजीत मुहूर्त
11:18 – 12:01

अशुभ समय

राहुकाल
07:37 – 08:58
यमगंड
10:19 – 11:40
गुलिक काल
13:01 – 14:22

26 नवंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:16 – 07:37शुभ
काल07:37 – 08:58टालें
शुभ08:58 – 10:19शुभ
रोग10:19 – 11:40टालें
उद्वेग11:40 – 13:01टालें
चर13:01 – 14:22सामान्य
लाभ14:22 – 15:42शुभ
अमृत15:42 – 17:03शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:03 – 18:42सामान्य
रोग18:42 – 20:22टालें
काल20:22 – 22:01टालें
लाभ22:01 – 23:40शुभ
उद्वेग23:40 – 01:19टालें
शुभ01:19 – 02:59शुभ
अमृत02:59 – 04:38शुभ
चर04:38 – 06:17सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:1607:10दिन
शनि07:1008:04दिन
गुरु08:0408:58दिन
मंगल08:5809:52दिन
सूर्य09:5210:46दिन
शुक्र10:4611:40दिन
बुध11:4012:34दिन
चंद्र12:3413:28दिन
शनि13:2814:22दिन
गुरु14:2215:15दिन
मंगल15:1516:09दिन
सूर्य16:0917:03दिन
शुक्र17:0318:09रात
बुध18:0919:16रात
चंद्र19:1620:22रात
शनि20:2221:28रात
गुरु21:2822:34रात
मंगल22:3423:40रात
सूर्य23:4000:46रात
शुक्र00:4601:53रात
बुध01:5302:59रात
चंद्र02:5904:05रात
शनि04:0505:11रात
गुरु05:1106:17रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 नव॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 दिस॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 दिस॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
5 दिस॰ 2029मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
9 दिस॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 दिस॰ 2029धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिस॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 दिस॰ 2029मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
24 दिस॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2748° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।