8 जनवरी 2025 को सिएटल का पंचांग

बुधवार, 8 जनवरी 2025, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

बुधवार, 8 जनवरी 2025 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (22:53 तक), नक्षत्र भरणी (01:37, 9 जन॰ तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 07:56 पर और सूर्यास्त 16:36 पर है। राहुकाल 12:16 से 13:21 तक है।

दिन और रात
दिन 07:56 – 16:36
रात 07:55 तक
तिथि
दशमी, 22:53 तक
एकादशी
नक्षत्र
भरणी, 01:37 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 जनवरी 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल दशमी 22:53 तक
शुक्ल एकादशी 20:50, 9 जन॰ तक
नक्षत्र
भरणी 01:37, 9 जन॰ तक
कृत्तिका 00:15, 10 जन॰ तक
योग
साध्य 03:59, 9 जन॰ तक
शुभ 01:06, 10 जन॰ तक
करण
तैतिल 11:54 तक
गर 22:53 तक
वणिज 09:51, 9 जन॰ तक
चंद्र राशि
मेष 07:16, 9 जन॰ तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:56
सूर्यास्त
16:36
चंद्रोदय
12:04
चंद्रास्त
02:28
दिनमान
8h 41m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:53 – 06:54
अभिजीत मुहूर्त
11:59 – 12:33 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:16 – 13:21
यमगंड
09:01 – 10:06
गुलिक काल
11:11 – 12:16

8 जनवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ07:56 – 09:01शुभ
अमृत09:01 – 10:06शुभ
काल10:06 – 11:11टालें
शुभ11:11 – 12:16शुभ
रोग12:16 – 13:21टालें
उद्वेग13:21 – 14:26टालें
चर14:26 – 15:31सामान्य
लाभ15:31 – 16:36शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग16:36 – 18:31टालें
शुभ18:31 – 20:26शुभ
अमृत20:26 – 22:21शुभ
चर22:21 – 00:16सामान्य
रोग00:16 – 02:11टालें
काल02:11 – 04:05टालें
लाभ04:05 – 06:00शुभ
उद्वेग06:00 – 07:55टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध07:5608:39दिन
चंद्र08:3909:22दिन
शनि09:2210:06दिन
गुरु10:0610:49दिन
मंगल10:4911:33दिन
सूर्य11:3312:16दिन
शुक्र12:1612:59दिन
बुध12:5913:43दिन
चंद्र13:4314:26दिन
शनि14:2615:09दिन
गुरु15:0915:53दिन
मंगल15:5316:36दिन
सूर्य16:3617:53रात
शुक्र17:5319:09रात
बुध19:0920:26रात
चंद्र20:2621:43रात
शनि21:4322:59रात
गुरु22:5900:16रात
मंगल00:1601:32रात
सूर्य01:3202:49रात
शुक्र02:4904:05रात
बुध04:0505:22रात
चंद्र05:2206:39रात
शनि06:3907:55रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 जन॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 जन॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 जन॰ 2025पौष पूर्णिमापूर्णिमा
13 जन॰ 2025मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
17 जन॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 जन॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 जन॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 जन॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 जन॰ 2025माघ अमावस्याअमावस्या
1 फ़र॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2066° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।