18 जनवरी 2025 को सिएटल का पंचांग

शनिवार, 18 जनवरी 2025, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

शनिवार, 18 जनवरी 2025 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (18:01 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (04:00, 19 जन॰ तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 07:50 पर और सूर्यास्त 16:49 पर है। राहुकाल 10:05 से 11:12 तक है।

दिन और रात
दिन 07:50 – 16:49
रात 07:49 तक
तिथि
पंचमी, 18:01 तक
षष्ठी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 04:00 तक
हस्त
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 जनवरी 2025 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 18:01 तक
कृष्ण षष्ठी 20:29, 19 जन॰ तक
नक्षत्र
हस्त 07:00, 20 जन॰ तक
योग
शोभन 11:45 तक
अतिगंडअशुभ 12:27, 19 जन॰ तक
करण
तैतिल 18:01 तक
गर 07:12, 19 जन॰ तक
वणिज 20:29, 19 जन॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 07:58 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:50
सूर्यास्त
16:49
चंद्रोदय
22:22
चंद्रास्त
10:07
दिनमान
9h 0m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:50 – 06:50
अभिजीत मुहूर्त
12:02 – 12:38

अशुभ समय

राहुकाल
10:05 – 11:12
यमगंड
13:27 – 14:35
गुलिक काल
07:50 – 08:57

18 जनवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल07:50 – 08:57टालें
शुभ08:57 – 10:05शुभ
रोग10:05 – 11:12टालें
उद्वेग11:12 – 12:20टालें
चर12:20 – 13:27सामान्य
लाभ13:27 – 14:35शुभ
अमृत14:35 – 15:42शुभ
काल15:42 – 16:49टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ16:49 – 18:42शुभ
उद्वेग18:42 – 20:34टालें
शुभ20:34 – 22:27शुभ
अमृत22:27 – 00:19शुभ
चर00:19 – 02:12सामान्य
रोग02:12 – 04:04टालें
काल04:04 – 05:56टालें
लाभ05:56 – 07:49शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि07:5008:35दिन
गुरु08:3509:20दिन
मंगल09:2010:05दिन
सूर्य10:0510:50दिन
शुक्र10:5011:35दिन
बुध11:3512:20दिन
चंद्र12:2013:05दिन
शनि13:0513:50दिन
गुरु13:5014:35दिन
मंगल14:3515:20दिन
सूर्य15:2016:05दिन
शुक्र16:0516:49दिन
बुध16:4918:04रात
चंद्र18:0419:19रात
शनि19:1920:34रात
गुरु20:3421:49रात
मंगल21:4923:04रात
सूर्य23:0400:19रात
शुक्र00:1901:34रात
बुध01:3402:49रात
चंद्र02:4904:04रात
शनि04:0405:19रात
गुरु05:1906:34रात
मंगल06:3407:49रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
21 जन॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 जन॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 जन॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 जन॰ 2025माघ अमावस्याअमावस्या
1 फ़र॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 फ़र॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 फ़र॰ 2025माघ पूर्णिमापूर्णिमा
12 फ़र॰ 2025कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
16 फ़र॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2070° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।