27 फ़रवरी 2025 को सिएटल का पंचांग

गुरुवार, 27 फ़रवरी 2025, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

गुरुवार, 27 फ़रवरी 2025 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (16:44 तक), नक्षत्र शतभिषा (00:10, 28 फ़र॰ तक) और योग शिव है। सूर्योदय 06:52 पर और सूर्यास्त 17:51 पर है। राहुकाल 13:44 से 15:07 तक है।

दिन और रात
दिन 06:52 – 17:51
रात 06:50 तक
तिथि
अमावस्या, 16:44 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
शतभिषा, 00:10 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 फ़रवरी 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
अमावस्या 16:44 तक
शुक्ल प्रतिपदा 13:46, 28 फ़र॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 00:10, 28 फ़र॰ तक
पूर्वा भाद्रपद 21:52, 28 फ़र॰ तक
योग
शिव 10:10 तक
सिद्ध 06:37, 28 फ़र॰ तक
साध्य 02:54, 1 मार्च तक
करण
नाग 16:44 तक
किंस्तुघ्न 03:17, 28 फ़र॰ तक
बव 13:46, 28 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:52
सूर्यास्त
17:51
चंद्रोदय
06:59
चंद्रास्त
17:44
दिनमान
10h 59m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:08 – 06:00
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:44

अशुभ समय

राहुकाल
13:44 – 15:07
यमगंड
06:52 – 08:15
गुलिक काल
09:37 – 10:59

27 फ़रवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:52 – 08:15शुभ
रोग08:15 – 09:37टालें
उद्वेग09:37 – 10:59टालें
चर10:59 – 12:22सामान्य
लाभ12:22 – 13:44शुभ
अमृत13:44 – 15:07शुभ
काल15:07 – 16:29टालें
शुभ16:29 – 17:51शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:51 – 19:29शुभ
चर19:29 – 21:06सामान्य
रोग21:06 – 22:43टालें
काल22:43 – 00:21टालें
लाभ00:21 – 01:58शुभ
उद्वेग01:58 – 03:36टालें
शुभ03:36 – 05:13शुभ
अमृत05:13 – 06:50शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:5207:47दिन
मंगल07:4708:42दिन
सूर्य08:4209:37दिन
शुक्र09:3710:32दिन
बुध10:3211:27दिन
चंद्र11:2712:22दिन
शनि12:2213:17दिन
गुरु13:1714:12दिन
मंगल14:1215:07दिन
सूर्य15:0716:01दिन
शुक्र16:0116:56दिन
बुध16:5617:51दिन
चंद्र17:5118:56रात
शनि18:5620:01रात
गुरु20:0121:06रात
मंगल21:0622:11रात
सूर्य22:1123:16रात
शुक्र23:1600:21रात
बुध00:2101:26रात
चंद्र01:2602:31रात
शनि02:3103:36रात
गुरु03:3604:41रात
मंगल04:4105:45रात
सूर्य05:4506:50रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 फ़र॰ 2025फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
2 मार्च 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
9 मार्च 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 मार्च 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 मार्च 2025फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
14 मार्च 2025मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
17 मार्च 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 मार्च 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 मार्च 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 मार्च 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 मार्च 2025चैत्र अमावस्याअमावस्या

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2085° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।