12 सितंबर 2025 को सिएटल का पंचांग

शुक्रवार, 12 सितंबर 2025, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

शुक्रवार, 12 सितंबर 2025 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (18:53 तक), नक्षत्र कृत्तिका (21:41 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 06:43 पर और सूर्यास्त 19:26 पर है। राहुकाल 11:29 से 13:04 तक है।

दिन और रात
दिन 06:43 – 19:26
रात 06:44 तक
तिथि
षष्ठी, 18:53 तक
सप्तमी
नक्षत्र
कृत्तिका, 21:41 तक
रोहिणी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 सितंबर 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 18:53 तक
कृष्ण सप्तमी 16:34, 13 सित॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 20:11, 13 सित॰ तक
योग
हर्षण 22:02 तक
वज्रअशुभ 19:05, 13 सित॰ तक
करण
गर 08:09 तक
वणिज 18:53 तक
विष्टि (भद्रा) 05:41, 13 सित॰ तक
बव 16:34, 13 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:43
सूर्यास्त
19:26
चंद्रोदय
21:36
चंद्रास्त
13:25
दिनमान
12h 43m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:13 – 05:58
अभिजीत मुहूर्त
12:39 – 13:30

अशुभ समय

राहुकाल
11:29 – 13:04
यमगंड
16:15 – 17:51
गुलिक काल
08:18 – 09:54

12 सितंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:43 – 08:18सामान्य
लाभ08:18 – 09:54शुभ
अमृत09:54 – 11:29शुभ
काल11:29 – 13:04टालें
शुभ13:04 – 14:40शुभ
रोग14:40 – 16:15टालें
उद्वेग16:15 – 17:51टालें
चर17:51 – 19:26सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:26 – 20:51टालें
काल20:51 – 22:16टालें
लाभ22:16 – 23:40शुभ
उद्वेग23:40 – 01:05टालें
शुभ01:05 – 02:30शुभ
अमृत02:30 – 03:55शुभ
चर03:55 – 05:19सामान्य
रोग05:19 – 06:44टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:4307:46दिन
बुध07:4608:50दिन
चंद्र08:5009:54दिन
शनि09:5410:57दिन
गुरु10:5712:01दिन
मंगल12:0113:04दिन
सूर्य13:0414:08दिन
शुक्र14:0815:12दिन
बुध15:1216:15दिन
चंद्र16:1517:19दिन
शनि17:1918:23दिन
गुरु18:2319:26दिन
मंगल19:2620:23रात
सूर्य20:2321:19रात
शुक्र21:1922:16रात
बुध22:1623:12रात
चंद्र23:1200:09रात
शनि00:0901:05रात
गुरु01:0502:02रात
मंगल02:0202:58रात
सूर्य02:5803:55रात
शुक्र03:5504:51रात
बुध04:5105:48रात
चंद्र05:4806:44रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 सित॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 सित॰ 2025कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
17 सित॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
19 सित॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 सित॰ 2025आश्विन अमावस्याअमावस्या
25 सित॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 अक्टू॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
4 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
6 अक्टू॰ 2025आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
9 अक्टू॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2160° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।