16 सितंबर 2025 को सिएटल का पंचांग

मंगलवार, 16 सितंबर 2025, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

मंगलवार, 16 सितंबर 2025 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (11:52 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (17:56 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 06:48 पर और सूर्यास्त 19:18 पर है। राहुकाल 16:10 से 17:44 तक है।

दिन और रात
दिन 06:48 – 19:18
रात 06:49 तक
तिथि
दशमी, 11:52 तक
एकादशी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 17:56 तक
पुष्य
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 सितंबर 2025 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण दशमी 11:52 तक
कृष्ण एकादशी 11:10, 17 सित॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 18:02, 17 सित॰ तक
योग
वरीयान 12:04 तक
परिघअशुभ 10:25, 17 सित॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 11:52 तक
बव 23:27 तक
बालव 11:10, 17 सित॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 11:58 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:48
सूर्यास्त
19:18
चंद्रोदय
00:33
चंद्रास्त
17:25
दिनमान
12h 30m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:16 – 06:02
अभिजीत मुहूर्त
12:38 – 13:28

अशुभ समय

राहुकाल
16:10 – 17:44
यमगंड
09:56 – 11:29
गुलिक काल
13:03 – 14:37

16 सितंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:48 – 08:22टालें
उद्वेग08:22 – 09:56टालें
चर09:56 – 11:29सामान्य
लाभ11:29 – 13:03शुभ
अमृत13:03 – 14:37शुभ
काल14:37 – 16:10टालें
शुभ16:10 – 17:44शुभ
रोग17:44 – 19:18टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल19:18 – 20:44टालें
लाभ20:44 – 22:11शुभ
उद्वेग22:11 – 23:37टालें
शुभ23:37 – 01:04शुभ
अमृत01:04 – 02:30शुभ
चर02:30 – 03:57सामान्य
रोग03:57 – 05:23टालें
काल05:23 – 06:49टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:4807:51दिन
सूर्य07:5108:53दिन
शुक्र08:5309:56दिन
बुध09:5610:58दिन
चंद्र10:5812:01दिन
शनि12:0113:03दिन
गुरु13:0314:06दिन
मंगल14:0615:08दिन
सूर्य15:0816:10दिन
शुक्र16:1017:13दिन
बुध17:1318:15दिन
चंद्र18:1519:18दिन
शनि19:1820:16रात
गुरु20:1621:13रात
मंगल21:1322:11रात
सूर्य22:1123:08रात
शुक्र23:0800:06रात
बुध00:0601:04रात
चंद्र01:0402:01रात
शनि02:0102:59रात
गुरु02:5903:57रात
मंगल03:5704:54रात
सूर्य04:5405:52रात
शुक्र05:5206:49रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 सित॰ 2025कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
17 सित॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
19 सित॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 सित॰ 2025आश्विन अमावस्याअमावस्या
25 सित॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 अक्टू॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
4 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
6 अक्टू॰ 2025आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
9 अक्टू॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
13 अक्टू॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2162° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।