28 अक्टूबर 2025 को सिएटल का पंचांग

मंगलवार, 28 अक्टूबर 2025, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

मंगलवार, 28 अक्टूबर 2025 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (20:53 तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (05:00, 29 अक्टू॰ तक) और योग धृति है। सूर्योदय 07:48 पर और सूर्यास्त 17:57 पर है। राहुकाल 15:25 से 16:41 तक है।

दिन और रात
दिन 07:48 – 17:57
रात 07:49 तक
तिथि
सप्तमी, 20:53 तक
अष्टमी
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 05:00 तक
श्रवण
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 20:53 तक
शुक्ल अष्टमी 21:37, 29 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 05:00, 29 अक्टू॰ तक
श्रवण 06:03, 30 अक्टू॰ तक
योग
धृति 19:21 तक
शूलअशुभ 18:50, 29 अक्टू॰ तक
करण
गर 08:16 तक
वणिज 20:53 तक
विष्टि (भद्रा) 09:20, 29 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
धनु 09:44 तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:48
सूर्यास्त
17:57
चंद्रोदय
14:39
चंद्रास्त
23:00
दिनमान
10h 9m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:57 – 06:52
अभिजीत मुहूर्त
12:32 – 13:13

अशुभ समय

राहुकाल
15:25 – 16:41
यमगंड
10:20 – 11:36
गुलिक काल
12:52 – 14:08

28 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग07:48 – 09:04टालें
उद्वेग09:04 – 10:20टालें
चर10:20 – 11:36सामान्य
लाभ11:36 – 12:52शुभ
अमृत12:52 – 14:08शुभ
काल14:08 – 15:25टालें
शुभ15:25 – 16:41शुभ
रोग16:41 – 17:57टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:57 – 19:41टालें
लाभ19:41 – 21:25शुभ
उद्वेग21:25 – 23:09टालें
शुभ23:09 – 00:53शुभ
अमृत00:53 – 02:37शुभ
चर02:37 – 04:21सामान्य
रोग04:21 – 06:05टालें
काल06:05 – 07:49टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल07:4808:38दिन
सूर्य08:3809:29दिन
शुक्र09:2910:20दिन
बुध10:2011:11दिन
चंद्र11:1112:01दिन
शनि12:0112:52दिन
गुरु12:5213:43दिन
मंगल13:4314:34दिन
सूर्य14:3415:25दिन
शुक्र15:2516:15दिन
बुध16:1517:06दिन
चंद्र17:0617:57दिन
शनि17:5719:06रात
गुरु19:0620:16रात
मंगल20:1621:25रात
सूर्य21:2522:34रात
शुक्र22:3423:44रात
बुध23:4400:53रात
चंद्र00:5302:02रात
शनि02:0203:12रात
गुरु03:1204:21रात
मंगल04:2105:30रात
सूर्य05:3006:40रात
शुक्र06:4007:49रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 नव॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 नव॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
4 नव॰ 2025कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
8 नव॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 नव॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 नव॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2025वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 नव॰ 2025मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
23 नव॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2178° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।