3 नवंबर 2025 को सिएटल का पंचांग

सोमवार, 3 नवंबर 2025, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

सोमवार, 3 नवंबर 2025 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (12:36 तक), नक्षत्र रेवती (23:04 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 06:57 पर और सूर्यास्त 16:48 पर है। राहुकाल 08:10 से 09:24 तक है।

दिन और रात
दिन 06:57 – 16:48
रात 06:58 तक
तिथि
त्रयोदशी, 12:36 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
रेवती, 23:04 तक
अश्विनी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 नवंबर 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 12:36 तक
शुक्ल चतुर्दशी 09:06, 4 नव॰ तक
नक्षत्र
रेवती 23:04 तक
अश्विनी 20:10, 4 नव॰ तक
योग
वज्रअशुभ 02:12, 4 नव॰ तक
सिद्धि 21:58, 4 नव॰ तक
करण
तैतिल 12:36 तक
गर 22:54 तक
वणिज 09:06, 4 नव॰ तक
चंद्र राशि
मीन 23:04 तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:57
सूर्यास्त
16:48
चंद्रोदय
15:39
चंद्रास्त
04:30
दिनमान
9h 51m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:04 – 06:00
अभिजीत मुहूर्त
11:32 – 12:12

अशुभ समय

राहुकाल
08:10 – 09:24
यमगंड
10:38 – 11:52
गुलिक काल
13:06 – 14:20

3 नवंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:57 – 08:10शुभ
काल08:10 – 09:24टालें
शुभ09:24 – 10:38शुभ
रोग10:38 – 11:52टालें
उद्वेग11:52 – 13:06टालें
चर13:06 – 14:20सामान्य
लाभ14:20 – 15:34शुभ
अमृत15:34 – 16:48शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर16:48 – 18:34सामान्य
रोग18:34 – 20:20टालें
काल20:20 – 22:07टालें
लाभ22:07 – 23:53शुभ
उद्वेग23:53 – 01:39टालें
शुभ01:39 – 03:25शुभ
अमृत03:25 – 05:12शुभ
चर05:12 – 06:58सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:5707:46दिन
शनि07:4608:35दिन
गुरु08:3509:24दिन
मंगल09:2410:14दिन
सूर्य10:1411:03दिन
शुक्र11:0311:52दिन
बुध11:5212:41दिन
चंद्र12:4113:31दिन
शनि13:3114:20दिन
गुरु14:2015:09दिन
मंगल15:0915:58दिन
सूर्य15:5816:48दिन
शुक्र16:4817:58रात
बुध17:5819:09रात
चंद्र19:0920:20रात
शनि20:2021:31रात
गुरु21:3122:42रात
मंगल22:4223:53रात
सूर्य23:5301:04रात
शुक्र01:0402:15रात
बुध02:1503:25रात
चंद्र03:2504:36रात
शनि04:3605:47रात
गुरु05:4706:58रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 नव॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
4 नव॰ 2025कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
8 नव॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 नव॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 नव॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2025वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 नव॰ 2025मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
23 नव॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
30 नव॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
2 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2180° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।