26 जनवरी 2026 को सिएटल का पंचांग

सोमवार, 26 जनवरी 2026, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

सोमवार, 26 जनवरी 2026 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (07:48 तक), नक्षत्र भरणी (21:39 तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 07:42 पर और सूर्यास्त 17:01 पर है। राहुकाल 08:52 से 10:02 तक है।

दिन और रात
दिन 07:42 – 17:01
रात 07:41 तक
तिथि
नवमी, 05:35 तक
दशमी
नक्षत्र
भरणी, 21:39 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 जनवरी 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 07:48 तक
शुक्ल नवमी 05:35, 27 जन॰ तक
शुक्ल दशमी 03:06, 28 जन॰ तक
नक्षत्र
भरणी 21:39 तक
कृत्तिका 19:57, 27 जन॰ तक
योग
शुभ 16:49 तक
शुक्ल 13:43, 27 जन॰ तक
करण
बव 07:48 तक
बालव 18:44 तक
कौलव 05:35, 27 जन॰ तक
तैतिल 16:23, 27 जन॰ तक
चंद्र राशि
मेष 03:15, 27 जन॰ तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:42
सूर्यास्त
17:01
चंद्रोदय
10:50
चंद्रास्त
01:33
दिनमान
9h 19m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:45 – 06:43
अभिजीत मुहूर्त
12:03 – 12:40

अशुभ समय

राहुकाल
08:52 – 10:02
यमगंड
11:12 – 12:22
गुलिक काल
13:32 – 14:41

26 जनवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:42 – 08:52शुभ
काल08:52 – 10:02टालें
शुभ10:02 – 11:12शुभ
रोग11:12 – 12:22टालें
उद्वेग12:22 – 13:32टालें
चर13:32 – 14:41सामान्य
लाभ14:41 – 15:51शुभ
अमृत15:51 – 17:01शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:01 – 18:51सामान्य
रोग18:51 – 20:41टालें
काल20:41 – 22:31टालें
लाभ22:31 – 00:21शुभ
उद्वेग00:21 – 02:11टालें
शुभ02:11 – 04:01शुभ
अमृत04:01 – 05:51शुभ
चर05:51 – 07:41सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:4208:29दिन
शनि08:2909:15दिन
गुरु09:1510:02दिन
मंगल10:0210:49दिन
सूर्य10:4911:35दिन
शुक्र11:3512:22दिन
बुध12:2213:08दिन
चंद्र13:0813:55दिन
शनि13:5514:41दिन
गुरु14:4115:28दिन
मंगल15:2816:14दिन
सूर्य16:1417:01दिन
शुक्र17:0118:14रात
बुध18:1419:28रात
चंद्र19:2820:41रात
शनि20:4121:54रात
गुरु21:5423:08रात
मंगल23:0800:21रात
सूर्य00:2101:34रात
शुक्र01:3402:48रात
बुध02:4804:01रात
चंद्र04:0105:14रात
शनि05:1406:28रात
गुरु06:2807:41रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
28 जन॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
30 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 फ़र॰ 2026माघ पूर्णिमापूर्णिमा
5 फ़र॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
9 फ़र॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
12 फ़र॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 फ़र॰ 2026कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
14 फ़र॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 फ़र॰ 2026फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
20 फ़र॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2212° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।