3 मार्च 2026 को सिएटल का पंचांग

मंगलवार, 3 मार्च 2026, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

मंगलवार, 3 मार्च 2026 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (03:19, 4 मार्च तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (18:09 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 06:45 पर और सूर्यास्त 17:57 पर है। राहुकाल 15:09 से 16:33 तक है।

दिन और रात
दिन 06:45 – 17:57
रात 06:43 तक
तिथि
प्रतिपदा, 03:19 तक
द्वितीया
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 18:09 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 मार्च 2026 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 03:19, 4 मार्च तक
कृष्ण द्वितीया 03:34, 5 मार्च तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 18:47, 4 मार्च तक
योग
धृति 19:22 तक
शूलअशुभ 18:15, 4 मार्च तक
करण
बालव 15:24 तक
कौलव 03:19, 4 मार्च तक
तैतिल 15:22, 4 मार्च तक
चंद्र राशि
सिंह 00:15, 4 मार्च तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:45
सूर्यास्त
17:57
चंद्रोदय
18:37
चंद्रास्त
06:50
दिनमान
11h 12m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:02 – 05:54
अभिजीत मुहूर्त
11:59 – 12:43

अशुभ समय

राहुकाल
15:09 – 16:33
यमगंड
09:33 – 10:57
गुलिक काल
12:21 – 13:45

3 मार्च 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:45 – 08:09टालें
उद्वेग08:09 – 09:33टालें
चर09:33 – 10:57सामान्य
लाभ10:57 – 12:21शुभ
अमृत12:21 – 13:45शुभ
काल13:45 – 15:09टालें
शुभ15:09 – 16:33शुभ
रोग16:33 – 17:57टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:57 – 19:33टालें
लाभ19:33 – 21:09शुभ
उद्वेग21:09 – 22:44टालें
शुभ22:44 – 00:20शुभ
अमृत00:20 – 01:56शुभ
चर01:56 – 03:32सामान्य
रोग03:32 – 05:07टालें
काल05:07 – 06:43टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:4507:41दिन
सूर्य07:4108:37दिन
शुक्र08:3709:33दिन
बुध09:3310:29दिन
चंद्र10:2911:25दिन
शनि11:2512:21दिन
गुरु12:2113:17दिन
मंगल13:1714:13दिन
सूर्य14:1315:09दिन
शुक्र15:0916:05दिन
बुध16:0517:01दिन
चंद्र17:0117:57दिन
शनि17:5719:01रात
गुरु19:0120:05रात
मंगल20:0521:09रात
सूर्य21:0922:12रात
शुक्र22:1223:16रात
बुध23:1600:20रात
चंद्र00:2001:24रात
शनि01:2402:28रात
गुरु02:2803:32रात
मंगल03:3204:35रात
सूर्य04:3505:39रात
शुक्र05:3906:43रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 मार्च 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 मार्च 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 मार्च 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 मार्च 2026मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
16 मार्च 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 मार्च 2026चैत्र अमावस्याअमावस्या
22 मार्च 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
28 मार्च 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
30 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 अप्रैल 2026चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2226° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।