2 मार्च 2026 को सिएटल का पंचांग

सोमवार, 2 मार्च 2026, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

सोमवार, 2 मार्च 2026 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (03:37, 3 मार्च तक), नक्षत्र मघा (18:01 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 06:47 पर और सूर्यास्त 17:55 पर है। राहुकाल 08:11 से 09:34 तक है।

दिन और रात
दिन 06:47 – 17:55
रात 06:45 तक
तिथि
पूर्णिमा, 03:37 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
मघा, 18:01 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 मार्च 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
पूर्णिमा 03:37, 3 मार्च तक
कृष्ण प्रतिपदा 03:19, 4 मार्च तक
नक्षत्र
मघा 18:01 तक
पूर्वा फाल्गुनी 18:09, 3 मार्च तक
योग
सुकर्मा 20:54 तक
धृति 19:22, 3 मार्च तक
करण
विष्टि (भद्रा) 15:58 तक
बव 03:37, 3 मार्च तक
बालव 15:24, 3 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:47
सूर्यास्त
17:55
चंद्रोदय
17:22
चंद्रास्त
06:33
दिनमान
11h 8m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:04 – 05:55
अभिजीत मुहूर्त
11:59 – 12:44

अशुभ समय

राहुकाल
08:11 – 09:34
यमगंड
10:58 – 12:21
गुलिक काल
13:45 – 15:08

2 मार्च 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:47 – 08:11शुभ
काल08:11 – 09:34टालें
शुभ09:34 – 10:58शुभ
रोग10:58 – 12:21टालें
उद्वेग12:21 – 13:45टालें
चर13:45 – 15:08सामान्य
लाभ15:08 – 16:32शुभ
अमृत16:32 – 17:55शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:55 – 19:32सामान्य
रोग19:32 – 21:08टालें
काल21:08 – 22:44टालें
लाभ22:44 – 00:20शुभ
उद्वेग00:20 – 01:56टालें
शुभ01:56 – 03:33शुभ
अमृत03:33 – 05:09शुभ
चर05:09 – 06:45सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:4707:43दिन
शनि07:4308:38दिन
गुरु08:3809:34दिन
मंगल09:3410:30दिन
सूर्य10:3011:26दिन
शुक्र11:2612:21दिन
बुध12:2113:17दिन
चंद्र13:1714:13दिन
शनि14:1315:08दिन
गुरु15:0816:04दिन
मंगल16:0417:00दिन
सूर्य17:0017:55दिन
शुक्र17:5519:00रात
बुध19:0020:04रात
चंद्र20:0421:08रात
शनि21:0822:12रात
गुरु22:1223:16रात
मंगल23:1600:20रात
सूर्य00:2001:24रात
शुक्र01:2402:29रात
बुध02:2903:33रात
चंद्र03:3304:37रात
शनि04:3705:41रात
गुरु05:4106:45रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 मार्च 2026फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
6 मार्च 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 मार्च 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 मार्च 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 मार्च 2026मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
16 मार्च 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 मार्च 2026चैत्र अमावस्याअमावस्या
22 मार्च 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
28 मार्च 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
30 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2226° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।