22 सितंबर 2026 को सिएटल का पंचांग

मंगलवार, 22 सितंबर 2026, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (09:13 तक), नक्षत्र श्रवण (20:39 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 06:56 पर और सूर्यास्त 19:06 पर है। राहुकाल 16:04 से 17:35 तक है।

दिन और रात
दिन 06:56 – 19:06
रात 06:57 तक
तिथि
द्वादशी
नक्षत्र
श्रवण, 20:39 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 सितंबर 2026 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 09:13 तक
शुक्ल द्वादशी 10:20, 23 सित॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 20:39 तक
धनिष्ठा 22:05, 23 सित॰ तक
योग
सुकर्मा 03:57, 23 सित॰ तक
धृति 03:24, 24 सित॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 09:13 तक
बव 21:52 तक
बालव 10:20, 23 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:56
सूर्यास्त
19:06
चंद्रोदय
17:37
चंद्रास्त
02:13
दिनमान
12h 10m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:22 – 06:09
अभिजीत मुहूर्त
12:37 – 13:25

अशुभ समय

राहुकाल
16:04 – 17:35
यमगंड
09:58 – 11:30
गुलिक काल
13:01 – 14:32

22 सितंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:56 – 08:27टालें
उद्वेग08:27 – 09:58टालें
चर09:58 – 11:30सामान्य
लाभ11:30 – 13:01शुभ
अमृत13:01 – 14:32शुभ
काल14:32 – 16:04टालें
शुभ16:04 – 17:35शुभ
रोग17:35 – 19:06टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल19:06 – 20:35टालें
लाभ20:35 – 22:04शुभ
उद्वेग22:04 – 23:33टालें
शुभ23:33 – 01:02शुभ
अमृत01:02 – 02:31शुभ
चर02:31 – 03:59सामान्य
रोग03:59 – 05:28टालें
काल05:28 – 06:57टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:5607:57दिन
सूर्य07:5708:58दिन
शुक्र08:5809:58दिन
बुध09:5810:59दिन
चंद्र10:5912:00दिन
शनि12:0013:01दिन
गुरु13:0114:02दिन
मंगल14:0215:03दिन
सूर्य15:0316:04दिन
शुक्र16:0417:04दिन
बुध17:0418:05दिन
चंद्र18:0519:06दिन
शनि19:0620:05रात
गुरु20:0521:05रात
मंगल21:0522:04रात
सूर्य22:0423:03रात
शुक्र23:0300:02रात
बुध00:0201:02रात
चंद्र01:0202:01रात
शनि02:0103:00रात
गुरु03:0003:59रात
मंगल03:5904:59रात
सूर्य04:5905:58रात
शुक्र05:5806:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 सित॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 सित॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 सित॰ 2026भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
29 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अक्टू॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2026आश्विन अमावस्याअमावस्या
14 अक्टू॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
21 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2304° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।