5 नवंबर 2026 को सिएटल का पंचांग

गुरुवार, 5 नवंबर 2026, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (21:01 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (14:26 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 06:59 पर और सूर्यास्त 16:45 पर है। राहुकाल 13:05 से 14:19 तक है।

दिन और रात
दिन 06:59 – 16:45
रात 07:01 तक
तिथि
द्वादशी, 21:01 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 14:26 तक
हस्त
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 नवंबर 2026 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 21:01 तक
कृष्ण त्रयोदशी 21:18, 6 नव॰ तक
नक्षत्र
हस्त 15:13, 6 नव॰ तक
योग
वैधृतिअशुभ 15:39 तक
विष्कंभअशुभ 14:40, 6 नव॰ तक
करण
कौलव 09:00 तक
तैतिल 21:01 तक
गर 09:06, 6 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:59
सूर्यास्त
16:45
चंद्रोदय
03:07
चंद्रास्त
14:59
दिनमान
9h 46m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:06 – 06:02
अभिजीत मुहूर्त
11:33 – 12:12

अशुभ समय

राहुकाल
13:05 – 14:19
यमगंड
06:59 – 08:12
गुलिक काल
09:26 – 10:39

5 नवंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:59 – 08:12शुभ
रोग08:12 – 09:26टालें
उद्वेग09:26 – 10:39टालें
चर10:39 – 11:52सामान्य
लाभ11:52 – 13:05शुभ
अमृत13:05 – 14:19शुभ
काल14:19 – 15:32टालें
शुभ15:32 – 16:45शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत16:45 – 18:32शुभ
चर18:32 – 20:19सामान्य
रोग20:19 – 22:06टालें
काल22:06 – 23:53टालें
लाभ23:53 – 01:40शुभ
उद्वेग01:40 – 03:27टालें
शुभ03:27 – 05:14शुभ
अमृत05:14 – 07:01शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:5907:48दिन
मंगल07:4808:37दिन
सूर्य08:3709:26दिन
शुक्र09:2610:15दिन
बुध10:1511:03दिन
चंद्र11:0311:52दिन
शनि11:5212:41दिन
गुरु12:4113:30दिन
मंगल13:3014:19दिन
सूर्य14:1915:07दिन
शुक्र15:0715:56दिन
बुध15:5616:45दिन
चंद्र16:4517:56रात
शनि17:5619:08रात
गुरु19:0820:19रात
मंगल20:1921:30रात
सूर्य21:3022:42रात
शुक्र22:4223:53रात
बुध23:5301:04रात
चंद्र01:0402:16रात
शनि02:1603:27रात
गुरु03:2704:38रात
मंगल04:3805:49रात
सूर्य05:4907:01रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 नव॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 नव॰ 2026कार्तिक अमावस्याअमावस्या
12 नव॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2026वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
20 नव॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 नव॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
23 नव॰ 2026कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
27 नव॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 दिस॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2321° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।