18 सितंबर 2027 को सिएटल का पंचांग

शनिवार, 18 सितंबर 2027, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

शनिवार, 18 सितंबर 2027 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (18:39 तक), नक्षत्र अश्विनी (05:11, 19 सित॰ तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 06:50 पर और सूर्यास्त 19:15 पर है। राहुकाल 09:56 से 11:29 तक है।

दिन और रात
दिन 06:50 – 19:15
रात 06:51 तक
तिथि
तृतीया, 18:39 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
अश्विनी, 05:11 तक
भरणी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 सितंबर 2027 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 18:39 तक
कृष्ण चतुर्थी 18:39, 19 सित॰ तक
नक्षत्र
अश्विनी 05:11, 19 सित॰ तक
भरणी 05:39, 20 सित॰ तक
योग
ध्रुव 19:49 तक
व्याघातअशुभ 18:44, 19 सित॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 18:39 तक
बव 06:42, 19 सित॰ तक
बालव 18:39, 19 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:50
सूर्यास्त
19:15
चंद्रोदय
19:54
चंद्रास्त
10:02
दिनमान
12h 25m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:18 – 06:04
अभिजीत मुहूर्त
12:38 – 13:27

अशुभ समय

राहुकाल
09:56 – 11:29
यमगंड
14:36 – 16:09
गुलिक काल
06:50 – 08:23

18 सितंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:50 – 08:23टालें
शुभ08:23 – 09:56शुभ
रोग09:56 – 11:29टालें
उद्वेग11:29 – 13:02टालें
चर13:02 – 14:36सामान्य
लाभ14:36 – 16:09शुभ
अमृत16:09 – 17:42शुभ
काल17:42 – 19:15टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ19:15 – 20:42शुभ
उद्वेग20:42 – 22:09टालें
शुभ22:09 – 23:36शुभ
अमृत23:36 – 01:03शुभ
चर01:03 – 02:30सामान्य
रोग02:30 – 03:57टालें
काल03:57 – 05:24टालें
लाभ05:24 – 06:51शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:5007:52दिन
गुरु07:5208:54दिन
मंगल08:5409:56दिन
सूर्य09:5610:58दिन
शुक्र10:5812:00दिन
बुध12:0013:02दिन
चंद्र13:0214:05दिन
शनि14:0515:07दिन
गुरु15:0716:09दिन
मंगल16:0917:11दिन
सूर्य17:1118:13दिन
शुक्र18:1319:15दिन
बुध19:1520:13रात
चंद्र20:1321:11रात
शनि21:1122:09रात
गुरु22:0923:07रात
मंगल23:0700:05रात
सूर्य00:0501:03रात
शुक्र01:0302:01रात
बुध02:0102:59रात
चंद्र02:5903:57रात
शनि03:5704:55रात
गुरु04:5505:53रात
मंगल05:5306:51रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
19 सित॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 सित॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 सित॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 सित॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 सित॰ 2027आश्विन अमावस्याअमावस्या
3 अक्टू॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 अक्टू॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 अक्टू॰ 2027आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
17 अक्टू॰ 2027तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2442° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।