22 सितंबर 2027 को सिएटल का पंचांग

बुधवार, 22 सितंबर 2027, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

बुधवार, 22 सितंबर 2027 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (16:07 तक), नक्षत्र मृगशिरा (04:37, 23 सित॰ तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 06:56 पर और सूर्यास्त 19:07 पर है। राहुकाल 13:01 से 14:32 तक है।

दिन और रात
दिन 06:56 – 19:07
रात 06:57 तक
तिथि
सप्तमी, 16:07 तक
अष्टमी
नक्षत्र
मृगशिरा, 04:37 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 सितंबर 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 16:07 तक
कृष्ण अष्टमी 14:27, 23 सित॰ तक
नक्षत्र
मृगशिरा 04:37, 23 सित॰ तक
आर्द्रा 03:28, 24 सित॰ तक
योग
सिद्धि 13:29 तक
व्यतीपातअशुभ 11:05, 23 सित॰ तक
करण
बव 16:07 तक
बालव 03:20, 23 सित॰ तक
कौलव 14:27, 23 सित॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 17:02 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:56
सूर्यास्त
19:07
चंद्रोदय
22:36
चंद्रास्त
14:46
दिनमान
12h 11m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:21 – 06:08
अभिजीत मुहूर्त
12:37 – 13:25 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
13:01 – 14:32
यमगंड
08:27 – 09:58
गुलिक काल
11:30 – 13:01

22 सितंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:56 – 08:27शुभ
अमृत08:27 – 09:58शुभ
काल09:58 – 11:30टालें
शुभ11:30 – 13:01शुभ
रोग13:01 – 14:32टालें
उद्वेग14:32 – 16:04टालें
चर16:04 – 17:35सामान्य
लाभ17:35 – 19:07शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:07 – 20:35टालें
शुभ20:35 – 22:04शुभ
अमृत22:04 – 23:33शुभ
चर23:33 – 01:02सामान्य
रोग01:02 – 02:31टालें
काल02:31 – 03:59टालें
लाभ03:59 – 05:28शुभ
उद्वेग05:28 – 06:57टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:5607:56दिन
चंद्र07:5608:57दिन
शनि08:5709:58दिन
गुरु09:5810:59दिन
मंगल10:5912:00दिन
सूर्य12:0013:01दिन
शुक्र13:0114:02दिन
बुध14:0215:03दिन
चंद्र15:0316:04दिन
शनि16:0417:05दिन
गुरु17:0518:06दिन
मंगल18:0619:07दिन
सूर्य19:0720:06रात
शुक्र20:0621:05रात
बुध21:0522:04रात
चंद्र22:0423:03रात
शनि23:0300:03रात
गुरु00:0301:02रात
मंगल01:0202:01रात
सूर्य02:0103:00रात
शुक्र03:0003:59रात
बुध03:5904:58रात
चंद्र04:5805:58रात
शनि05:5806:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 सित॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 सित॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 सित॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 सित॰ 2027आश्विन अमावस्याअमावस्या
3 अक्टू॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 अक्टू॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 अक्टू॰ 2027आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
17 अक्टू॰ 2027तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2443° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।