1 नवंबर 2027 को सिएटल का पंचांग

सोमवार, 1 नवंबर 2027, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

सोमवार, 1 नवंबर 2027 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (05:32, 2 नव॰ तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (22:36 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 07:53 पर और सूर्यास्त 17:51 पर है। राहुकाल 09:08 से 10:22 तक है।

दिन और रात
दिन 07:53 – 17:51
रात 07:54 तक
तिथि
चतुर्थी, 05:32 तक
पंचमी
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 22:36 तक
मूल
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 नवंबर 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 05:32, 2 नव॰ तक
शुक्ल पंचमी 07:02, 3 नव॰ तक
नक्षत्र
मूल 00:27, 3 नव॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 06:56, 2 नव॰ तक
सुकर्मा 07:00, 3 नव॰ तक
करण
वणिज 17:03 तक
विष्टि (भद्रा) 05:32, 2 नव॰ तक
बव 18:12, 2 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:53
सूर्यास्त
17:51
चंद्रोदय
11:49
चंद्रास्त
19:37
दिनमान
9h 58m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
06:01 – 06:57
अभिजीत मुहूर्त
12:32 – 13:12

अशुभ समय

राहुकाल
09:08 – 10:22
यमगंड
11:37 – 12:52
गुलिक काल
14:07 – 15:22

1 नवंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:53 – 09:08शुभ
काल09:08 – 10:22टालें
शुभ10:22 – 11:37शुभ
रोग11:37 – 12:52टालें
उद्वेग12:52 – 14:07टालें
चर14:07 – 15:22सामान्य
लाभ15:22 – 16:37शुभ
अमृत16:37 – 17:51शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:51 – 19:37सामान्य
रोग19:37 – 21:22टालें
काल21:22 – 23:07टालें
लाभ23:07 – 00:53शुभ
उद्वेग00:53 – 02:38टालें
शुभ02:38 – 04:24शुभ
अमृत04:24 – 06:09शुभ
चर06:09 – 07:54सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:5308:43दिन
शनि08:4309:33दिन
गुरु09:3310:22दिन
मंगल10:2211:12दिन
सूर्य11:1212:02दिन
शुक्र12:0212:52दिन
बुध12:5213:42दिन
चंद्र13:4214:32दिन
शनि14:3215:22दिन
गुरु15:2216:12दिन
मंगल16:1217:01दिन
सूर्य17:0117:51दिन
शुक्र17:5119:02रात
बुध19:0220:12रात
चंद्र20:1221:22रात
शनि21:2222:32रात
गुरु22:3223:43रात
मंगल23:4300:53रात
सूर्य00:5302:03रात
शुक्र02:0303:13रात
बुध03:1304:24रात
चंद्र04:2405:34रात
शनि05:3406:44रात
गुरु06:4407:54रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 नव॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
9 नव॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 नव॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 नव॰ 2027कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
16 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
20 नव॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 नव॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 नव॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 नव॰ 2027मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2459° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।