29 जनवरी 2027 को सिलचर का पंचांग

शुक्रवार, 29 जनवरी 2027, सिलचर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 29 जनवरी 2027 को सिलचर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (04:58, 30 जन॰ तक), नक्षत्र स्वाति (01:54, 30 जन॰ तक) और योग शूल है। सूर्योदय 06:02 पर और सूर्यास्त 17:01 पर है। राहुकाल 10:09 से 11:31 तक है।

दिन और रात
दिन 06:02 – 17:01
रात 06:02 तक
तिथि
अष्टमी, 04:58 तक
नवमी
नक्षत्र
स्वाति, 01:54 तक
विशाखा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 जनवरी 2027 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 04:58, 30 जन॰ तक
कृष्ण नवमी 06:34, 31 जन॰ तक
नक्षत्र
स्वाति 01:54, 30 जन॰ तक
विशाखा 03:55, 31 जन॰ तक
योग
शूलअशुभ 16:13 तक
गंडअशुभ 16:02, 30 जन॰ तक
करण
बालव 16:25 तक
कौलव 04:58, 30 जन॰ तक
तैतिल 17:41, 30 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:02
सूर्यास्त
17:01
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
10:17
दिनमान
10h 59m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:18 – 05:10
अभिजीत मुहूर्त
11:09 – 11:53

अशुभ समय

राहुकाल
10:09 – 11:31
यमगंड
14:16 – 15:38
गुलिक काल
07:24 – 08:47

29 जनवरी 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:02 – 07:24सामान्य
लाभ07:24 – 08:47शुभ
अमृत08:47 – 10:09शुभ
काल10:09 – 11:31टालें
शुभ11:31 – 12:54शुभ
रोग12:54 – 14:16टालें
उद्वेग14:16 – 15:38टालें
चर15:38 – 17:01सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:01 – 18:38टालें
काल18:38 – 20:16टालें
लाभ20:16 – 21:54शुभ
उद्वेग21:54 – 23:31टालें
शुभ23:31 – 01:09शुभ
अमृत01:09 – 02:46शुभ
चर02:46 – 04:24सामान्य
रोग04:24 – 06:02टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:0206:57दिन
बुध06:5707:52दिन
चंद्र07:5208:47दिन
शनि08:4709:42दिन
गुरु09:4210:37दिन
मंगल10:3711:31दिन
सूर्य11:3112:26दिन
शुक्र12:2613:21दिन
बुध13:2114:16दिन
चंद्र14:1615:11दिन
शनि15:1116:06दिन
गुरु16:0617:01दिन
मंगल17:0118:06रात
सूर्य18:0619:11रात
शुक्र19:1120:16रात
बुध20:1621:21रात
चंद्र21:2122:26रात
शनि22:2623:31रात
गुरु23:3100:36रात
मंगल00:3601:41रात
सूर्य01:4102:46रात
शुक्र02:4603:52रात
बुध03:5204:57रात
चंद्र04:5706:02रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 जन॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 फ़र॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 फ़र॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 फ़र॰ 2027माघ अमावस्याअमावस्या
10 फ़र॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 फ़र॰ 2027कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
19 फ़र॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 फ़र॰ 2027माघ पूर्णिमापूर्णिमा
24 फ़र॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां सिलचर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2353° (लाहिड़ी)। समय सिलचर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।