1 जनवरी 2028 को सिलचर का पंचांग

शनिवार, 1 जनवरी 2028, सिलचर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 1 जनवरी 2028 को सिलचर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (10:55 तक), नक्षत्र धनिष्ठा (16:15 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 06:03 पर और सूर्यास्त 16:40 पर है। राहुकाल 08:42 से 10:02 तक है।

दिन और रात
दिन 06:03 – 16:40
रात 06:03 तक
तिथि
चतुर्थी, 10:55 तक
पंचमी
नक्षत्र
धनिष्ठा, 16:15 तक
शतभिषा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 जनवरी 2028 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 10:55 तक
शुक्ल पंचमी 13:40, 2 जन॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 19:22, 2 जन॰ तक
योग
वज्रअशुभ 10:43 तक
सिद्धि 11:42, 2 जन॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 10:55 तक
बव 00:18, 2 जन॰ तक
बालव 13:40, 2 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:03
सूर्यास्त
16:40
चंद्रोदय
08:52
चंद्रास्त
20:36
दिनमान
10h 38m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:16 – 05:09
अभिजीत मुहूर्त
11:00 – 11:43

अशुभ समय

राहुकाल
08:42 – 10:02
यमगंड
12:41 – 14:01
गुलिक काल
06:03 – 07:22

1 जनवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:03 – 07:22टालें
शुभ07:22 – 08:42शुभ
रोग08:42 – 10:02टालें
उद्वेग10:02 – 11:22टालें
चर11:22 – 12:41सामान्य
लाभ12:41 – 14:01शुभ
अमृत14:01 – 15:21शुभ
काल15:21 – 16:40टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ16:40 – 18:21शुभ
उद्वेग18:21 – 20:01टालें
शुभ20:01 – 21:41शुभ
अमृत21:41 – 23:22शुभ
चर23:22 – 01:02सामान्य
रोग01:02 – 02:42टालें
काल02:42 – 04:23टालें
लाभ04:23 – 06:03शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:0306:56दिन
गुरु06:5607:49दिन
मंगल07:4908:42दिन
सूर्य08:4209:35दिन
शुक्र09:3510:28दिन
बुध10:2811:22दिन
चंद्र11:2212:15दिन
शनि12:1513:08दिन
गुरु13:0814:01दिन
मंगल14:0114:54दिन
सूर्य14:5415:47दिन
शुक्र15:4716:40दिन
बुध16:4017:47रात
चंद्र17:4718:54रात
शनि18:5420:01रात
गुरु20:0121:08रात
मंगल21:0822:15रात
सूर्य22:1523:22रात
शुक्र23:2200:29रात
बुध00:2901:35रात
चंद्र01:3502:42रात
शनि02:4203:49रात
गुरु03:4904:56रात
मंगल04:5606:03रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 जन॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 जन॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 जन॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 जन॰ 2028पौष पूर्णिमापूर्णिमा
15 जन॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जन॰ 2028मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
19 जन॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
22 जन॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
24 जन॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 जन॰ 2028माघ अमावस्याअमावस्या
30 जन॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां सिलचर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2482° (लाहिड़ी)। समय सिलचर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।