23 दिसंबर 2026 को सिंगापुर का पंचांग

बुधवार, 23 दिसंबर 2026, सिंगापुर, सिंगापुर। समय Asia/Singapore में है।

बुधवार, 23 दिसंबर 2026 को सिंगापुर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (13:17 तक), नक्षत्र रोहिणी (10:26 तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 07:02 पर और सूर्यास्त 19:05 पर है। राहुकाल 13:03 से 14:33 तक है।

दिन और रात
दिन 07:02 – 19:05
रात 07:02 तक
तिथि
चतुर्दशी, 13:17 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
रोहिणी, 10:26 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 दिसंबर 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 13:17 तक
पूर्णिमा 09:28, 24 दिस॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 10:26 तक
मृगशिरा 07:23, 24 दिस॰ तक
योग
शुभ 19:45 तक
शुक्ल 15:21, 24 दिस॰ तक
करण
वणिज 13:17 तक
विष्टि (भद्रा) 23:23 तक
बव 09:28, 24 दिस॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 20:56 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:02
सूर्यास्त
19:05
चंद्रोदय
18:21
चंद्रास्त
05:51
दिनमान
12h 3m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:26 – 06:14
अभिजीत मुहूर्त
12:39 – 13:27 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
13:03 – 14:33
यमगंड
08:32 – 10:02
गुलिक काल
11:33 – 13:03

23 दिसंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ07:02 – 08:32शुभ
अमृत08:32 – 10:02शुभ
काल10:02 – 11:33टालें
शुभ11:33 – 13:03शुभ
रोग13:03 – 14:33टालें
उद्वेग14:33 – 16:04टालें
चर16:04 – 17:34सामान्य
लाभ17:34 – 19:05शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:05 – 20:34टालें
शुभ20:34 – 22:04शुभ
अमृत22:04 – 23:34शुभ
चर23:34 – 01:03सामान्य
रोग01:03 – 02:33टालें
काल02:33 – 04:03टालें
लाभ04:03 – 05:32शुभ
उद्वेग05:32 – 07:02टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध07:0208:02दिन
चंद्र08:0209:02दिन
शनि09:0210:02दिन
गुरु10:0211:03दिन
मंगल11:0312:03दिन
सूर्य12:0313:03दिन
शुक्र13:0314:03दिन
बुध14:0315:04दिन
चंद्र15:0416:04दिन
शनि16:0417:04दिन
गुरु17:0418:04दिन
मंगल18:0419:05दिन
सूर्य19:0520:04रात
शुक्र20:0421:04रात
बुध21:0422:04रात
चंद्र22:0423:04रात
शनि23:0400:04रात
गुरु00:0401:03रात
मंगल01:0302:03रात
सूर्य02:0303:03रात
शुक्र03:0304:03रात
बुध04:0305:03रात
चंद्र05:0306:02रात
शनि06:0207:02रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
27 दिस॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
31 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 जन॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 जन॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 जन॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
12 जन॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2027मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
19 जन॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 जन॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां सिंगापुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2339° (लाहिड़ी)। समय सिंगापुर (Asia/Singapore) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।