3 जनवरी 2025 को सुवा का पंचांग

शुक्रवार, 3 जनवरी 2025, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

शुक्रवार, 3 जनवरी 2025 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (07:38 तक), नक्षत्र श्रवण (05:40 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 05:34 पर और सूर्यास्त 18:46 पर है। राहुकाल 10:31 से 12:10 तक है।

दिन और रात
दिन 05:34 – 18:46
रात 05:35 तक
तिथि
चतुर्थी
नक्षत्र
धनिष्ठा, 04:51 तक
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 जनवरी 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 07:38 तक
शुक्ल चतुर्थी 06:10, 4 जन॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 05:40 तक
धनिष्ठा 04:51, 4 जन॰ तक
शतभिषा 03:53, 5 जन॰ तक
योग
वज्रअशुभ 19:07 तक
सिद्धि 16:38, 4 जन॰ तक
करण
गर 07:38 तक
वणिज 18:55 तक
विष्टि (भद्रा) 06:10, 4 जन॰ तक
चंद्र राशि
मकर 17:17 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:34
सूर्यास्त
18:46
चंद्रोदय
08:21
चंद्रास्त
21:32
दिनमान
13h 11m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:08 – 04:51
अभिजीत मुहूर्त
11:44 – 12:37

अशुभ समय

राहुकाल
10:31 – 12:10
यमगंड
15:28 – 17:07
गुलिक काल
07:13 – 08:52

3 जनवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:34 – 07:13सामान्य
लाभ07:13 – 08:52शुभ
अमृत08:52 – 10:31शुभ
काल10:31 – 12:10टालें
शुभ12:10 – 13:49शुभ
रोग13:49 – 15:28टालें
उद्वेग15:28 – 17:07टालें
चर17:07 – 18:46सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:46 – 20:07टालें
काल20:07 – 21:28टालें
लाभ21:28 – 22:49शुभ
उद्वेग22:49 – 00:10टालें
शुभ00:10 – 01:32शुभ
अमृत01:32 – 02:53शुभ
चर02:53 – 04:14सामान्य
रोग04:14 – 05:35टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:3406:40दिन
बुध06:4007:46दिन
चंद्र07:4608:52दिन
शनि08:5209:58दिन
गुरु09:5811:04दिन
मंगल11:0412:10दिन
सूर्य12:1013:16दिन
शुक्र13:1614:22दिन
बुध14:2215:28दिन
चंद्र15:2816:34दिन
शनि16:3417:40दिन
गुरु17:4018:46दिन
मंगल18:4619:40रात
सूर्य19:4020:34रात
शुक्र20:3421:28रात
बुध21:2822:22रात
चंद्र22:2223:16रात
शनि23:1600:10रात
गुरु00:1001:05रात
मंगल01:0501:59रात
सूर्य01:5902:53रात
शुक्र02:5303:47रात
बुध03:4704:41रात
चंद्र04:4105:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 जन॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 जन॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 जन॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 जन॰ 2025पौष पूर्णिमापूर्णिमा
14 जन॰ 2025मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 जन॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 जन॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 जन॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 जन॰ 2025माघ अमावस्याअमावस्या

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2064° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।