5 सितंबर 2025 को सुवा का पंचांग

शुक्रवार, 5 सितंबर 2025, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

शुक्रवार, 5 सितंबर 2025 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (10:38 तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (06:14 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 06:10 पर और सूर्यास्त 17:59 पर है। राहुकाल 10:36 से 12:05 तक है।

दिन और रात
दिन 06:10 – 17:59
रात 06:09 तक
तिथि
द्वादशी, 10:38 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
श्रवण, 06:08 तक
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 सितंबर 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 10:38 तक
शुक्ल त्रयोदशी 09:43, 6 सित॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 06:08, 6 सित॰ तक
धनिष्ठा 05:25, 7 सित॰ तक
योग
शोभन 20:22 तक
अतिगंडअशुभ 18:21, 6 सित॰ तक
करण
बालव 10:38 तक
कौलव 22:16 तक
तैतिल 09:43, 6 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:10
सूर्यास्त
17:59
चंद्रोदय
15:30
चंद्रास्त
04:06
दिनमान
11h 49m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:33 – 05:21
अभिजीत मुहूर्त
11:41 – 12:28

अशुभ समय

राहुकाल
10:36 – 12:05
यमगंड
15:02 – 16:31
गुलिक काल
07:39 – 09:07

5 सितंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:10 – 07:39सामान्य
लाभ07:39 – 09:07शुभ
अमृत09:07 – 10:36शुभ
काल10:36 – 12:05टालें
शुभ12:05 – 13:33शुभ
रोग13:33 – 15:02टालें
उद्वेग15:02 – 16:31टालें
चर16:31 – 17:59सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:59 – 19:30टालें
काल19:30 – 21:02टालें
लाभ21:02 – 22:33शुभ
उद्वेग22:33 – 00:04टालें
शुभ00:04 – 01:36शुभ
अमृत01:36 – 03:07शुभ
चर03:07 – 04:38सामान्य
रोग04:38 – 06:09टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:1007:09दिन
बुध07:0908:08दिन
चंद्र08:0809:07दिन
शनि09:0710:07दिन
गुरु10:0711:06दिन
मंगल11:0612:05दिन
सूर्य12:0513:04दिन
शुक्र13:0414:03दिन
बुध14:0315:02दिन
चंद्र15:0216:01दिन
शनि16:0117:00दिन
गुरु17:0017:59दिन
मंगल17:5919:00रात
सूर्य19:0020:01रात
शुक्र20:0121:02रात
बुध21:0222:03रात
चंद्र22:0323:03रात
शनि23:0300:04रात
गुरु00:0401:05रात
मंगल01:0502:06रात
सूर्य02:0603:07रात
शुक्र03:0704:08रात
बुध04:0805:09रात
चंद्र05:0906:09रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 सित॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
8 सित॰ 2025भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
11 सित॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 सित॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 सित॰ 2025कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सित॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
19 सित॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
22 सित॰ 2025आश्विन अमावस्याअमावस्या
26 सित॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2157° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।