4 अक्टूबर 2025 को सुवा का पंचांग

शनिवार, 4 अक्टूबर 2025, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

शनिवार, 4 अक्टूबर 2025 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (23:39 तक), नक्षत्र धनिष्ठा (15:39 तक) और योग शूल है। सूर्योदय 05:46 पर और सूर्यास्त 18:04 पर है। राहुकाल 08:50 से 10:22 तक है।

दिन और रात
दिन 05:46 – 18:04
रात 05:45 तक
तिथि
द्वादशी, 23:39 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
धनिष्ठा, 15:39 तक
शतभिषा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 23:39 तक
शुक्ल त्रयोदशी 21:34, 5 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 14:31, 5 अक्टू॰ तक
योग
शूलअशुभ 01:56, 5 अक्टू॰ तक
गंडअशुभ 23:04, 5 अक्टू॰ तक
करण
बव 12:27 तक
बालव 23:39 तक
कौलव 10:42, 5 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:46
सूर्यास्त
18:04
चंद्रोदय
15:10
चंद्रास्त
03:24
दिनमान
12h 18m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:12 – 04:59
अभिजीत मुहूर्त
11:30 – 12:19

अशुभ समय

राहुकाल
08:50 – 10:22
यमगंड
13:27 – 14:59
गुलिक काल
05:46 – 07:18

4 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:46 – 07:18टालें
शुभ07:18 – 08:50शुभ
रोग08:50 – 10:22टालें
उद्वेग10:22 – 11:55टालें
चर11:55 – 13:27सामान्य
लाभ13:27 – 14:59शुभ
अमृत14:59 – 16:32शुभ
काल16:32 – 18:04टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:04 – 19:31शुभ
उद्वेग19:31 – 20:59टालें
शुभ20:59 – 22:27शुभ
अमृत22:27 – 23:54शुभ
चर23:54 – 01:22सामान्य
रोग01:22 – 02:50टालें
काल02:50 – 04:17टालें
लाभ04:17 – 05:45शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:4606:47दिन
गुरु06:4707:49दिन
मंगल07:4908:50दिन
सूर्य08:5009:52दिन
शुक्र09:5210:53दिन
बुध10:5311:55दिन
चंद्र11:5512:56दिन
शनि12:5613:58दिन
गुरु13:5814:59दिन
मंगल14:5916:01दिन
सूर्य16:0117:02दिन
शुक्र17:0218:04दिन
बुध18:0419:02रात
चंद्र19:0220:01रात
शनि20:0120:59रात
गुरु20:5921:58रात
मंगल21:5822:56रात
सूर्य22:5623:54रात
शुक्र23:5400:53रात
बुध00:5301:51रात
चंद्र01:5102:50रात
शनि02:5003:48रात
गुरु03:4804:46रात
मंगल04:4605:45रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2025आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
10 अक्टू॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 अक्टू॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अक्टू॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 अक्टू॰ 2025तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 अक्टू॰ 2025कार्तिक अमावस्याअमावस्या
26 अक्टू॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 नव॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2169° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।