25 अक्टूबर 2025 को सुवा का पंचांग

शनिवार, 25 अक्टूबर 2025, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

शनिवार, 25 अक्टूबर 2025 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (07:50 तक), नक्षत्र अनुराधा (14:21 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 05:30 पर और सूर्यास्त 18:10 पर है। राहुकाल 08:40 से 10:15 तक है।

दिन और रात
दिन 05:30 – 18:10
रात 05:30 तक
तिथि
चतुर्थी
नक्षत्र
अनुराधा, 14:21 तक
ज्येष्ठा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 07:50 तक
शुक्ल चतुर्थी 10:18, 26 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 17:16, 26 अक्टू॰ तक
योग
सौभाग्य 12:24 तक
शोभन 13:15, 26 अक्टू॰ तक
करण
गर 07:50 तक
वणिज 21:05 तक
विष्टि (भद्रा) 10:18, 26 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:30
सूर्यास्त
18:10
चंद्रोदय
07:34
चंद्रास्त
21:18
दिनमान
12h 39m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:00 – 04:45
अभिजीत मुहूर्त
11:25 – 12:15

अशुभ समय

राहुकाल
08:40 – 10:15
यमगंड
13:25 – 15:00
गुलिक काल
05:30 – 07:05

25 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:30 – 07:05टालें
शुभ07:05 – 08:40शुभ
रोग08:40 – 10:15टालें
उद्वेग10:15 – 11:50टालें
चर11:50 – 13:25सामान्य
लाभ13:25 – 15:00शुभ
अमृत15:00 – 16:35शुभ
काल16:35 – 18:10टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:10 – 19:35शुभ
उद्वेग19:35 – 21:00टालें
शुभ21:00 – 22:25शुभ
अमृत22:25 – 23:50शुभ
चर23:50 – 01:15सामान्य
रोग01:15 – 02:40टालें
काल02:40 – 04:05टालें
लाभ04:05 – 05:30शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:3006:34दिन
गुरु06:3407:37दिन
मंगल07:3708:40दिन
सूर्य08:4009:43दिन
शुक्र09:4310:47दिन
बुध10:4711:50दिन
चंद्र11:5012:53दिन
शनि12:5313:57दिन
गुरु13:5715:00दिन
मंगल15:0016:03दिन
सूर्य16:0317:06दिन
शुक्र17:0618:10दिन
बुध18:1019:06रात
चंद्र19:0620:03रात
शनि20:0321:00रात
गुरु21:0021:56रात
मंगल21:5622:53रात
सूर्य22:5323:50रात
शुक्र23:5000:46रात
बुध00:4601:43रात
चंद्र01:4302:40रात
शनि02:4003:36रात
गुरु03:3604:33रात
मंगल04:3305:30रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 अक्टू॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 नव॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
4 नव॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 नव॰ 2025कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
9 नव॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
13 नव॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 नव॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2025वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 नव॰ 2025मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2177° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।