14 जनवरी 2026 को सुवा का पंचांग

बुधवार, 14 जनवरी 2026, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

बुधवार, 14 जनवरी 2026 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (00:23, 15 जन॰ तक), नक्षत्र विशाखा (06:36 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 05:41 पर और सूर्यास्त 18:48 पर है। राहुकाल 12:15 से 13:53 तक है।

दिन और रात
दिन 05:41 – 18:48
रात 05:42 तक
तिथि
एकादशी, 00:23 तक
द्वादशी
नक्षत्र
अनुराधा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 जनवरी 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 00:23, 15 जन॰ तक
कृष्ण द्वादशी 02:47, 16 जन॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 06:36 तक
अनुराधा 09:33, 15 जन॰ तक
योग
गंडअशुभ 02:25, 15 जन॰ तक
वृद्धि 03:08, 16 जन॰ तक
करण
बव 11:06 तक
बालव 00:23, 15 जन॰ तक
कौलव 13:37, 15 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:41
सूर्यास्त
18:48
चंद्रोदय
01:26
चंद्रास्त
15:01
दिनमान
13h 7m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:14 – 04:58
अभिजीत मुहूर्त
11:48 – 12:41 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:15 – 13:53
यमगंड
07:20 – 08:58
गुलिक काल
10:36 – 12:15

14 जनवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:41 – 07:20शुभ
अमृत07:20 – 08:58शुभ
काल08:58 – 10:36टालें
शुभ10:36 – 12:15शुभ
रोग12:15 – 13:53टालें
उद्वेग13:53 – 15:31टालें
चर15:31 – 17:10सामान्य
लाभ17:10 – 18:48शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:48 – 20:10टालें
शुभ20:10 – 21:31शुभ
अमृत21:31 – 22:53शुभ
चर22:53 – 00:15सामान्य
रोग00:15 – 01:37टालें
काल01:37 – 02:58टालें
लाभ02:58 – 04:20शुभ
उद्वेग04:20 – 05:42टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:4106:47दिन
चंद्र06:4707:52दिन
शनि07:5208:58दिन
गुरु08:5810:03दिन
मंगल10:0311:09दिन
सूर्य11:0912:15दिन
शुक्र12:1513:20दिन
बुध13:2014:26दिन
चंद्र14:2615:31दिन
शनि15:3116:37दिन
गुरु16:3717:42दिन
मंगल17:4218:48दिन
सूर्य18:4819:42रात
शुक्र19:4220:37रात
बुध20:3721:31रात
चंद्र21:3122:26रात
शनि22:2623:20रात
गुरु23:2000:15रात
मंगल00:1501:09रात
सूर्य01:0902:04रात
शुक्र02:0402:58रात
बुध02:5803:53रात
चंद्र03:5304:47रात
शनि04:4705:42रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 जन॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 जन॰ 2026मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 जन॰ 2026माघ अमावस्याअमावस्या
23 जन॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 जन॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 फ़र॰ 2026माघ पूर्णिमापूर्णिमा
6 फ़र॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 फ़र॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2208° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।