26 जनवरी 2029 को सुवा का पंचांग

शुक्रवार, 26 जनवरी 2029, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

शुक्रवार, 26 जनवरी 2029 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (23:43 तक), नक्षत्र रोहिणी (21:29 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 05:49 पर और सूर्यास्त 18:47 पर है। राहुकाल 10:41 से 12:18 तक है।

दिन और रात
दिन 05:49 – 18:47
रात 05:50 तक
तिथि
एकादशी, 23:43 तक
द्वादशी
नक्षत्र
रोहिणी, 21:29 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 जनवरी 2029 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 23:43 तक
शुक्ल द्वादशी 23:19, 27 जन॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 21:29 तक
मृगशिरा 21:45, 27 जन॰ तक
योग
ब्रह्म 17:17 तक
इंद्र 15:57, 27 जन॰ तक
करण
वणिज 11:38 तक
विष्टि (भद्रा) 23:43 तक
बव 11:37, 27 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:49
सूर्यास्त
18:47
चंद्रोदय
15:09
चंद्रास्त
01:28
दिनमान
12h 58m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:21 – 05:05
अभिजीत मुहूर्त
11:52 – 12:44

अशुभ समय

राहुकाल
10:41 – 12:18
यमगंड
15:33 – 17:10
गुलिक काल
07:26 – 09:04

26 जनवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:49 – 07:26सामान्य
लाभ07:26 – 09:04शुभ
अमृत09:04 – 10:41शुभ
काल10:41 – 12:18टालें
शुभ12:18 – 13:55शुभ
रोग13:55 – 15:33टालें
उद्वेग15:33 – 17:10टालें
चर17:10 – 18:47सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:47 – 20:10टालें
काल20:10 – 21:33टालें
लाभ21:33 – 22:56शुभ
उद्वेग22:56 – 00:18टालें
शुभ00:18 – 01:41शुभ
अमृत01:41 – 03:04शुभ
चर03:04 – 04:27सामान्य
रोग04:27 – 05:50टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:4906:54दिन
बुध06:5407:59दिन
चंद्र07:5909:04दिन
शनि09:0410:08दिन
गुरु10:0811:13दिन
मंगल11:1312:18दिन
सूर्य12:1813:23दिन
शुक्र13:2314:28दिन
बुध14:2815:33दिन
चंद्र15:3316:38दिन
शनि16:3817:43दिन
गुरु17:4318:47दिन
मंगल18:4719:43रात
सूर्य19:4320:38रात
शुक्र20:3821:33रात
बुध21:3322:28रात
चंद्र22:2823:23रात
शनि23:2300:18रात
गुरु00:1801:14रात
मंगल01:1402:09रात
सूर्य02:0903:04रात
शुक्र03:0403:59रात
बुध03:5904:54रात
चंद्र04:5405:50रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 जन॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 जन॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
30 जन॰ 2029माघ पूर्णिमापूर्णिमा
3 फ़र॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 फ़र॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 फ़र॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 फ़र॰ 2029फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
13 फ़र॰ 2029कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2631° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।