1 फ़रवरी 2029 को सुवा का पंचांग

गुरुवार, 1 फ़रवरी 2029, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

गुरुवार, 1 फ़रवरी 2029 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (12:20 तक), नक्षत्र मघा (14:15 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 05:52 पर और सूर्यास्त 18:46 पर है। राहुकाल 13:56 से 15:33 तक है।

दिन और रात
दिन 05:52 – 18:46
रात 05:53 तक
तिथि
द्वितीया, 12:20 तक
तृतीया
नक्षत्र
मघा, 14:15 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 फ़रवरी 2029 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 12:20 तक
कृष्ण तृतीया 09:15, 2 फ़र॰ तक
नक्षत्र
मघा 14:15 तक
पूर्वा फाल्गुनी 11:54, 2 फ़र॰ तक
योग
शोभन 22:00 तक
अतिगंडअशुभ 18:16, 2 फ़र॰ तक
करण
गर 12:20 तक
वणिज 22:47 तक
विष्टि (भद्रा) 09:15, 2 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:52
सूर्यास्त
18:46
चंद्रोदय
20:08
चंद्रास्त
07:27
दिनमान
12h 54m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:24 – 05:08
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:45

अशुभ समय

राहुकाल
13:56 – 15:33
यमगंड
05:52 – 07:29
गुलिक काल
09:06 – 10:43

1 फ़रवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:52 – 07:29शुभ
रोग07:29 – 09:06टालें
उद्वेग09:06 – 10:43टालें
चर10:43 – 12:19सामान्य
लाभ12:19 – 13:56शुभ
अमृत13:56 – 15:33शुभ
काल15:33 – 17:09टालें
शुभ17:09 – 18:46शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:46 – 20:09शुभ
चर20:09 – 21:33सामान्य
रोग21:33 – 22:56टालें
काल22:56 – 00:19टालें
लाभ00:19 – 01:43शुभ
उद्वेग01:43 – 03:06टालें
शुभ03:06 – 04:30शुभ
अमृत04:30 – 05:53शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:5206:57दिन
मंगल06:5708:01दिन
सूर्य08:0109:06दिन
शुक्र09:0610:10दिन
बुध10:1011:15दिन
चंद्र11:1512:19दिन
शनि12:1913:24दिन
गुरु13:2414:28दिन
मंगल14:2815:33दिन
सूर्य15:3316:37दिन
शुक्र16:3717:42दिन
बुध17:4218:46दिन
चंद्र18:4619:42रात
शनि19:4220:37रात
गुरु20:3721:33रात
मंगल21:3322:28रात
सूर्य22:2823:24रात
शुक्र23:2400:19रात
बुध00:1901:15रात
चंद्र01:1502:11रात
शनि02:1103:06रात
गुरु03:0604:02रात
मंगल04:0204:57रात
सूर्य04:5705:53रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 फ़र॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 फ़र॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 फ़र॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 फ़र॰ 2029फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
13 फ़र॰ 2029कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 फ़र॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 फ़र॰ 2029फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2634° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।