2 फ़रवरी 2029 को सुवा का पंचांग

शुक्रवार, 2 फ़रवरी 2029, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

शुक्रवार, 2 फ़रवरी 2029 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (09:15 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (11:54 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 05:53 पर और सूर्यास्त 18:46 पर है। राहुकाल 10:43 से 12:19 तक है।

दिन और रात
दिन 05:53 – 18:46
रात 05:53 तक
तिथि
तृतीया, 09:15 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 11:54 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 फ़रवरी 2029 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 09:15 तक
कृष्ण चतुर्थी 06:14, 3 फ़र॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 09:37, 3 फ़र॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 18:16 तक
सुकर्मा 14:37, 3 फ़र॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 09:15 तक
बव 19:43 तक
बालव 06:14, 3 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 17:19 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:53
सूर्यास्त
18:46
चंद्रोदय
20:50
चंद्रास्त
08:27
दिनमान
12h 53m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:24 – 05:08
अभिजीत मुहूर्त
11:54 – 12:45

अशुभ समय

राहुकाल
10:43 – 12:19
यमगंड
15:33 – 17:09
गुलिक काल
07:30 – 09:06

2 फ़रवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:53 – 07:30सामान्य
लाभ07:30 – 09:06शुभ
अमृत09:06 – 10:43शुभ
काल10:43 – 12:19टालें
शुभ12:19 – 13:56शुभ
रोग13:56 – 15:33टालें
उद्वेग15:33 – 17:09टालें
चर17:09 – 18:46सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:46 – 20:09टालें
काल20:09 – 21:33टालें
लाभ21:33 – 22:56शुभ
उद्वेग22:56 – 00:20टालें
शुभ00:20 – 01:43शुभ
अमृत01:43 – 03:07शुभ
चर03:07 – 04:30सामान्य
रोग04:30 – 05:53टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:5306:57दिन
बुध06:5708:02दिन
चंद्र08:0209:06दिन
शनि09:0610:11दिन
गुरु10:1111:15दिन
मंगल11:1512:19दिन
सूर्य12:1913:24दिन
शुक्र13:2414:28दिन
बुध14:2815:33दिन
चंद्र15:3316:37दिन
शनि16:3717:41दिन
गुरु17:4118:46दिन
मंगल18:4619:41रात
सूर्य19:4120:37रात
शुक्र20:3721:33रात
बुध21:3322:28रात
चंद्र22:2823:24रात
शनि23:2400:20रात
गुरु00:2001:15रात
मंगल01:1502:11रात
सूर्य02:1103:07रात
शुक्र03:0704:02रात
बुध04:0204:58रात
चंद्र04:5805:53रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 फ़र॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 फ़र॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 फ़र॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 फ़र॰ 2029फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
13 फ़र॰ 2029कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 फ़र॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 फ़र॰ 2029फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2634° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।