3 फ़रवरी 2029 को सुवा का पंचांग

शनिवार, 3 फ़रवरी 2029, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

शनिवार, 3 फ़रवरी 2029 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (06:14 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (09:37 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 05:53 पर और सूर्यास्त 18:45 पर है। राहुकाल 09:06 से 10:43 तक है।

दिन और रात
दिन 05:53 – 18:45
रात 05:54 तक
तिथि
पंचमी, 03:24 तक
षष्ठी
नक्षत्र
हस्त
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 फ़रवरी 2029 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 06:14 तक
कृष्ण पंचमी 03:24, 4 फ़र॰ तक
कृष्ण षष्ठी 00:53, 5 फ़र॰ तक
नक्षत्र
हस्त 07:33, 4 फ़र॰ तक
योग
सुकर्मा 14:37 तक
धृति 11:11, 4 फ़र॰ तक
करण
बालव 06:14 तक
कौलव 16:47 तक
तैतिल 03:24, 4 फ़र॰ तक
गर 14:06, 4 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:53
सूर्यास्त
18:45
चंद्रोदय
21:33
चंद्रास्त
09:27
दिनमान
12h 52m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:24 – 05:09
अभिजीत मुहूर्त
11:54 – 12:45

अशुभ समय

राहुकाल
09:06 – 10:43
यमगंड
13:56 – 15:32
गुलिक काल
05:53 – 07:30

3 फ़रवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:53 – 07:30टालें
शुभ07:30 – 09:06शुभ
रोग09:06 – 10:43टालें
उद्वेग10:43 – 12:19टालें
चर12:19 – 13:56सामान्य
लाभ13:56 – 15:32शुभ
अमृत15:32 – 17:09शुभ
काल17:09 – 18:45टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:45 – 20:09शुभ
उद्वेग20:09 – 21:33टालें
शुभ21:33 – 22:56शुभ
अमृत22:56 – 00:20शुभ
चर00:20 – 01:43सामान्य
रोग01:43 – 03:07टालें
काल03:07 – 04:30टालें
लाभ04:30 – 05:54शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:5306:58दिन
गुरु06:5808:02दिन
मंगल08:0209:06दिन
सूर्य09:0610:11दिन
शुक्र10:1111:15दिन
बुध11:1512:19दिन
चंद्र12:1913:24दिन
शनि13:2414:28दिन
गुरु14:2815:32दिन
मंगल15:3216:37दिन
सूर्य16:3717:41दिन
शुक्र17:4118:45दिन
बुध18:4519:41रात
चंद्र19:4120:37रात
शनि20:3721:33रात
गुरु21:3322:28रात
मंगल22:2823:24रात
सूर्य23:2400:20रात
शुक्र00:2001:15रात
बुध01:1502:11रात
चंद्र02:1103:07रात
शनि03:0704:03रात
गुरु04:0304:58रात
मंगल04:5805:54रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 फ़र॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 फ़र॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 फ़र॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 फ़र॰ 2029फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
13 फ़र॰ 2029कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 फ़र॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 फ़र॰ 2029फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
4 मार्च 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2634° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।