18 फ़रवरी 2029 को सुवा का पंचांग

रविवार, 18 फ़रवरी 2029, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

रविवार, 18 फ़रवरी 2029 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (07:19 तक), नक्षत्र रेवती (21:12 तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 06:01 पर और सूर्यास्त 18:39 पर है। राहुकाल 17:04 से 18:39 तक है।

दिन और रात
दिन 06:01 – 18:39
रात 06:01 तक
तिथि
पंचमी
नक्षत्र
रेवती, 21:12 तक
अश्विनी
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 फ़रवरी 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 07:19 तक
शुक्ल पंचमी 09:53, 19 फ़र॰ तक
नक्षत्र
रेवती 21:12 तक
अश्विनी 00:08, 20 फ़र॰ तक
योग
शुभ 22:56 तक
शुक्ल 23:46, 19 फ़र॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 07:19 तक
बव 20:36 तक
बालव 09:53, 19 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
मीन 21:12 तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:01
सूर्यास्त
18:39
चंद्रोदय
09:30
चंद्रास्त
21:14
दिनमान
12h 38m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:30 – 05:15
अभिजीत मुहूर्त
11:54 – 12:45

अशुभ समय

राहुकाल
17:04 – 18:39
यमगंड
12:20 – 13:54
गुलिक काल
15:29 – 17:04

18 फ़रवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:01 – 07:35टालें
चर07:35 – 09:10सामान्य
लाभ09:10 – 10:45शुभ
अमृत10:45 – 12:20शुभ
काल12:20 – 13:54टालें
शुभ13:54 – 15:29शुभ
रोग15:29 – 17:04टालें
उद्वेग17:04 – 18:39टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:39 – 20:04शुभ
अमृत20:04 – 21:29शुभ
चर21:29 – 22:54सामान्य
रोग22:54 – 00:20टालें
काल00:20 – 01:45टालें
लाभ01:45 – 03:10शुभ
उद्वेग03:10 – 04:36टालें
शुभ04:36 – 06:01शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:0107:04दिन
शुक्र07:0408:07दिन
बुध08:0709:10दिन
चंद्र09:1010:13दिन
शनि10:1311:16दिन
गुरु11:1612:20दिन
मंगल12:2013:23दिन
सूर्य13:2314:26दिन
शुक्र14:2615:29दिन
बुध15:2916:32दिन
चंद्र16:3217:35दिन
शनि17:3518:39दिन
गुरु18:3919:35रात
मंगल19:3520:32रात
सूर्य20:3221:29रात
शुक्र21:2922:26रात
बुध22:2623:23रात
चंद्र23:2300:20रात
शनि00:2001:17रात
गुरु01:1702:14रात
मंगल02:1403:10रात
सूर्य03:1004:07रात
शुक्र04:0705:04रात
बुध05:0406:01रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
25 फ़र॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 फ़र॰ 2029फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
4 मार्च 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 मार्च 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
11 मार्च 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 मार्च 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 मार्च 2029चैत्र अमावस्याअमावस्या
15 मार्च 2029मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
19 मार्च 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2640° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।