19 फ़रवरी 2029 को सुवा का पंचांग

सोमवार, 19 फ़रवरी 2029, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

सोमवार, 19 फ़रवरी 2029 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (09:53 तक), नक्षत्र अश्विनी (00:08, 20 फ़र॰ तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 06:01 पर और सूर्यास्त 18:38 पर है। राहुकाल 07:36 से 09:10 तक है।

दिन और रात
दिन 06:01 – 18:38
रात 06:01 तक
तिथि
पंचमी, 09:53 तक
षष्ठी
नक्षत्र
अश्विनी, 00:08 तक
भरणी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 फ़रवरी 2029 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 09:53 तक
शुक्ल षष्ठी 12:17, 20 फ़र॰ तक
नक्षत्र
अश्विनी 00:08, 20 फ़र॰ तक
भरणी 02:50, 21 फ़र॰ तक
योग
शुक्ल 23:46 तक
ब्रह्म 00:25, 21 फ़र॰ तक
करण
बालव 09:53 तक
कौलव 23:07 तक
तैतिल 12:17, 20 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:01
सूर्यास्त
18:38
चंद्रोदय
10:19
चंद्रास्त
21:52
दिनमान
12h 37m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:30 – 05:15
अभिजीत मुहूर्त
11:54 – 12:45

अशुभ समय

राहुकाल
07:36 – 09:10
यमगंड
10:45 – 12:19
गुलिक काल
13:54 – 15:29

19 फ़रवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:01 – 07:36शुभ
काल07:36 – 09:10टालें
शुभ09:10 – 10:45शुभ
रोग10:45 – 12:19टालें
उद्वेग12:19 – 13:54टालें
चर13:54 – 15:29सामान्य
लाभ15:29 – 17:03शुभ
अमृत17:03 – 18:38शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:38 – 20:03सामान्य
रोग20:03 – 21:29टालें
काल21:29 – 22:54टालें
लाभ22:54 – 00:20शुभ
उद्वेग00:20 – 01:45टालें
शुभ01:45 – 03:11शुभ
अमृत03:11 – 04:36शुभ
चर04:36 – 06:01सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:0107:04दिन
शनि07:0408:07दिन
गुरु08:0709:10दिन
मंगल09:1010:13दिन
सूर्य10:1311:16दिन
शुक्र11:1612:19दिन
बुध12:1913:23दिन
चंद्र13:2314:26दिन
शनि14:2615:29दिन
गुरु15:2916:32दिन
मंगल16:3217:35दिन
सूर्य17:3518:38दिन
शुक्र18:3819:35रात
बुध19:3520:32रात
चंद्र20:3221:29रात
शनि21:2922:26रात
गुरु22:2623:23रात
मंगल23:2300:20रात
सूर्य00:2001:17रात
शुक्र01:1702:14रात
बुध02:1403:11रात
चंद्र03:1104:07रात
शनि04:0705:04रात
गुरु05:0406:01रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
25 फ़र॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 फ़र॰ 2029फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
4 मार्च 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 मार्च 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
11 मार्च 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 मार्च 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 मार्च 2029चैत्र अमावस्याअमावस्या
15 मार्च 2029मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
19 मार्च 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2641° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।