5 नवंबर 2029 को सुवा का पंचांग

सोमवार, 5 नवंबर 2029, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

सोमवार, 5 नवंबर 2029 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (20:15 तक), नक्षत्र चित्रा (19:51 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 05:25 पर और सूर्यास्त 18:14 पर है। राहुकाल 07:01 से 08:37 तक है।

दिन और रात
दिन 05:25 – 18:14
रात 05:24 तक
तिथि
चतुर्दशी, 20:15 तक
अमावस्या
नक्षत्र
चित्रा, 19:51 तक
स्वाति
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 नवंबर 2029 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 20:15 तक
अमावस्या 16:24, 6 नव॰ तक
नक्षत्र
चित्रा 19:51 तक
स्वाति 16:46, 6 नव॰ तक
योग
प्रीति 21:27 तक
आयुष्मान 17:05, 6 नव॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 10:09 तक
शकुनि 20:15 तक
चतुष्पद 06:19, 6 नव॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 09:21 तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:25
सूर्यास्त
18:14
चंद्रोदय
04:03
चंद्रास्त
17:09
दिनमान
12h 50m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:55 – 04:40
अभिजीत मुहूर्त
11:24 – 12:15

अशुभ समय

राहुकाल
07:01 – 08:37
यमगंड
10:13 – 11:49
गुलिक काल
13:26 – 15:02

5 नवंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:25 – 07:01शुभ
काल07:01 – 08:37टालें
शुभ08:37 – 10:13शुभ
रोग10:13 – 11:49टालें
उद्वेग11:49 – 13:26टालें
चर13:26 – 15:02सामान्य
लाभ15:02 – 16:38शुभ
अमृत16:38 – 18:14शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:14 – 19:38सामान्य
रोग19:38 – 21:02टालें
काल21:02 – 22:26टालें
लाभ22:26 – 23:49शुभ
उद्वेग23:49 – 01:13टालें
शुभ01:13 – 02:37शुभ
अमृत02:37 – 04:01शुभ
चर04:01 – 05:24सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:2506:29दिन
शनि06:2907:33दिन
गुरु07:3308:37दिन
मंगल08:3709:41दिन
सूर्य09:4110:45दिन
शुक्र10:4511:49दिन
बुध11:4912:54दिन
चंद्र12:5413:58दिन
शनि13:5815:02दिन
गुरु15:0216:06दिन
मंगल16:0617:10दिन
सूर्य17:1018:14दिन
शुक्र18:1419:10रात
बुध19:1020:06रात
चंद्र20:0621:02रात
शनि21:0221:58रात
गुरु21:5822:53रात
मंगल22:5323:49रात
सूर्य23:4900:45रात
शुक्र00:4501:41रात
बुध01:4102:37रात
चंद्र02:3703:33रात
शनि03:3304:28रात
गुरु04:2805:24रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 नव॰ 2029कार्तिक अमावस्याअमावस्या
9 नव॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 नव॰ 2029वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
19 नव॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
21 नव॰ 2029कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
25 नव॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 नव॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 दिस॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 दिस॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2740° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।