18 सितंबर 2025 को सिडनी का पंचांग

गुरुवार, 18 सितंबर 2025, सिडनी, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Sydney में है।

गुरुवार, 18 सितंबर 2025 को सिडनी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (03:55, 19 सित॰ तक), नक्षत्र पुष्य (11:02 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 05:50 पर और सूर्यास्त 17:48 पर है। राहुकाल 13:19 से 14:49 तक है।

दिन और रात
दिन 05:50 – 17:48
रात 05:49 तक
तिथि
द्वादशी, 03:55 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
पुष्य, 11:02 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 सितंबर 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 03:55, 19 सित॰ तक
कृष्ण त्रयोदशी 04:07, 20 सित॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 11:02 तक
आश्लेषा 11:35, 19 सित॰ तक
योग
शिव 02:07, 19 सित॰ तक
सिद्ध 01:11, 20 सित॰ तक
करण
कौलव 15:59 तक
तैतिल 03:55, 19 सित॰ तक
गर 15:57, 19 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:50
सूर्यास्त
17:48
चंद्रोदय
03:51
चंद्रास्त
14:12
दिनमान
11h 58m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:14 – 05:02
अभिजीत मुहूर्त
11:25 – 12:13

अशुभ समय

राहुकाल
13:19 – 14:49
यमगंड
05:50 – 07:20
गुलिक काल
08:50 – 10:19

18 सितंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:50 – 07:20शुभ
रोग07:20 – 08:50टालें
उद्वेग08:50 – 10:19टालें
चर10:19 – 11:49सामान्य
लाभ11:49 – 13:19शुभ
अमृत13:19 – 14:49शुभ
काल14:49 – 16:18टालें
शुभ16:18 – 17:48शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:48 – 19:18शुभ
चर19:18 – 20:48सामान्य
रोग20:48 – 22:18टालें
काल22:18 – 23:48टालें
लाभ23:48 – 01:18शुभ
उद्वेग01:18 – 02:49टालें
शुभ02:49 – 04:19शुभ
अमृत04:19 – 05:49शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:5006:50दिन
मंगल06:5007:50दिन
सूर्य07:5008:50दिन
शुक्र08:5009:49दिन
बुध09:4910:49दिन
चंद्र10:4911:49दिन
शनि11:4912:49दिन
गुरु12:4913:49दिन
मंगल13:4914:49दिन
सूर्य14:4915:48दिन
शुक्र15:4816:48दिन
बुध16:4817:48दिन
चंद्र17:4818:48रात
शनि18:4819:48रात
गुरु19:4820:48रात
मंगल20:4821:48रात
सूर्य21:4822:48रात
शुक्र22:4823:48रात
बुध23:4800:48रात
चंद्र00:4801:49रात
शनि01:4902:49रात
गुरु02:4903:49रात
मंगल03:4904:49रात
सूर्य04:4905:49रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
19 सित॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 सित॰ 2025आश्विन अमावस्याअमावस्या
26 सित॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2025आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
10 अक्टू॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 अक्टू॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अक्टू॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 अक्टू॰ 2025तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश

तिथियां सिडनी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2162° (लाहिड़ी)। समय सिडनी (Australia/Sydney) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।