8 अक्टूबर 2025 को सिडनी का पंचांग

बुधवार, 8 अक्टूबर 2025, सिडनी, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Sydney में है।

बुधवार, 8 अक्टूबर 2025 को सिडनी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (11:23 तक), नक्षत्र रेवती (06:58 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 06:23 पर और सूर्यास्त 19:02 पर है। राहुकाल 12:43 से 14:18 तक है।

दिन और रात
दिन 06:23 – 19:02
रात 06:21 तक
तिथि
प्रतिपदा, 11:23 तक
द्वितीया
नक्षत्र
अश्विनी, 04:14 तक
भरणी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 11:23 तक
कृष्ण द्वितीया 07:53, 9 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
रेवती 06:58 तक
अश्विनी 04:14, 9 अक्टू॰ तक
भरणी 01:32, 10 अक्टू॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 11:05 तक
हर्षण 07:02, 9 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 11:23 तक
तैतिल 21:38 तक
गर 07:53, 9 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
मीन 06:58 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:23
सूर्यास्त
19:02
चंद्रोदय
20:27
चंद्रास्त
06:38
दिनमान
12h 40m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:52 – 05:37
अभिजीत मुहूर्त
12:17 – 13:08 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:43 – 14:18
यमगंड
07:58 – 09:33
गुलिक काल
11:08 – 12:43

8 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:23 – 07:58शुभ
अमृत07:58 – 09:33शुभ
काल09:33 – 11:08टालें
शुभ11:08 – 12:43शुभ
रोग12:43 – 14:18टालें
उद्वेग14:18 – 15:53टालें
चर15:53 – 17:27सामान्य
लाभ17:27 – 19:02शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:02 – 20:27टालें
शुभ20:27 – 21:52शुभ
अमृत21:52 – 23:17शुभ
चर23:17 – 00:42सामान्य
रोग00:42 – 02:07टालें
काल02:07 – 03:32टालें
लाभ03:32 – 04:56शुभ
उद्वेग04:56 – 06:21टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:2307:26दिन
चंद्र07:2608:29दिन
शनि08:2909:33दिन
गुरु09:3310:36दिन
मंगल10:3611:39दिन
सूर्य11:3912:43दिन
शुक्र12:4313:46दिन
बुध13:4614:49दिन
चंद्र14:4915:53दिन
शनि15:5316:56दिन
गुरु16:5617:59दिन
मंगल17:5919:02दिन
सूर्य19:0219:59रात
शुक्र19:5920:56रात
बुध20:5621:52रात
चंद्र21:5222:49रात
शनि22:4923:45रात
गुरु23:4500:42रात
मंगल00:4201:38रात
सूर्य01:3802:35रात
शुक्र02:3503:32रात
बुध03:3204:28रात
चंद्र04:2805:25रात
शनि05:2506:21रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 अक्टू॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 अक्टू॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अक्टू॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 अक्टू॰ 2025तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 अक्टू॰ 2025कार्तिक अमावस्याअमावस्या
26 अक्टू॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 नव॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
4 नव॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 नव॰ 2025कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां सिडनी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2170° (लाहिड़ी)। समय सिडनी (Australia/Sydney) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।