21 जनवरी 2026 को सिडनी का पंचांग

बुधवार, 21 जनवरी 2026, सिडनी, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Sydney में है।

बुधवार, 21 जनवरी 2026 को सिडनी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (08:13 तक), नक्षत्र धनिष्ठा (19:28 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 06:05 पर और सूर्यास्त 20:06 पर है। राहुकाल 13:06 से 14:51 तक है।

दिन और रात
दिन 06:05 – 20:06
रात 06:06 तक
तिथि
तृतीया
नक्षत्र
धनिष्ठा, 19:28 तक
शतभिषा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 जनवरी 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 08:13 तक
शुक्ल तृतीया 08:17, 22 जन॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 19:57, 22 जन॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 00:28, 22 जन॰ तक
वरीयान 23:07, 22 जन॰ तक
करण
कौलव 08:13 तक
तैतिल 20:18 तक
गर 08:17, 22 जन॰ तक
चंद्र राशि
मकर 07:05 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:05
सूर्यास्त
20:06
चंद्रोदय
08:04
चंद्रास्त
21:39
दिनमान
14h 2m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:45 – 05:25
अभिजीत मुहूर्त
12:38 – 13:34 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
13:06 – 14:51
यमगंड
07:50 – 09:35
गुलिक काल
11:20 – 13:06

21 जनवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:05 – 07:50शुभ
अमृत07:50 – 09:35शुभ
काल09:35 – 11:20टालें
शुभ11:20 – 13:06शुभ
रोग13:06 – 14:51टालें
उद्वेग14:51 – 16:36टालें
चर16:36 – 18:21सामान्य
लाभ18:21 – 20:06शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग20:06 – 21:21टालें
शुभ21:21 – 22:36शुभ
अमृत22:36 – 23:51शुभ
चर23:51 – 01:06सामान्य
रोग01:06 – 02:21टालें
काल02:21 – 03:36टालें
लाभ03:36 – 04:51शुभ
उद्वेग04:51 – 06:06टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:0507:15दिन
चंद्र07:1508:25दिन
शनि08:2509:35दिन
गुरु09:3510:45दिन
मंगल10:4511:55दिन
सूर्य11:5513:06दिन
शुक्र13:0614:16दिन
बुध14:1615:26दिन
चंद्र15:2616:36दिन
शनि16:3617:46दिन
गुरु17:4618:56दिन
मंगल18:5620:06दिन
सूर्य20:0620:56रात
शुक्र20:5621:46रात
बुध21:4622:36रात
चंद्र22:3623:26रात
शनि23:2600:16रात
गुरु00:1601:06रात
मंगल01:0601:56रात
सूर्य01:5602:46रात
शुक्र02:4603:36रात
बुध03:3604:26रात
चंद्र04:2605:16रात
शनि05:1606:06रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 जन॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 जन॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 फ़र॰ 2026माघ पूर्णिमापूर्णिमा
5 फ़र॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 फ़र॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 फ़र॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 फ़र॰ 2026कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
15 फ़र॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 फ़र॰ 2026फाल्गुन अमावस्याअमावस्या

तिथियां सिडनी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2210° (लाहिड़ी)। समय सिडनी (Australia/Sydney) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।