4 अक्टूबर 2027 को सिडनी का पंचांग

सोमवार, 4 अक्टूबर 2027, सिडनी, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Sydney में है।

सोमवार, 4 अक्टूबर 2027 को सिडनी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (06:58 तक), नक्षत्र अनुराधा (06:14, 5 अक्टू॰ तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 06:29 पर और सूर्यास्त 18:59 पर है। राहुकाल 08:02 से 09:36 तक है।

दिन और रात
दिन 06:29 – 18:59
रात 06:27 तक
तिथि
पंचमी
नक्षत्र
अनुराधा, 06:14 तक
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 अक्टूबर 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 06:58 तक
शुक्ल पंचमी 07:06, 5 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
अनुराधा 06:14, 5 अक्टू॰ तक
ज्येष्ठा 07:45, 6 अक्टू॰ तक
योग
प्रीति 17:55 तक
आयुष्मान 17:13, 5 अक्टू॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 06:58 तक
बव 18:56 तक
बालव 07:06, 5 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:29
सूर्यास्त
18:59
चंद्रोदय
08:38
चंद्रास्त
23:37
दिनमान
12h 31m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:57 – 05:43
अभिजीत मुहूर्त
12:19 – 13:09

अशुभ समय

राहुकाल
08:02 – 09:36
यमगंड
11:10 – 12:44
गुलिक काल
14:18 – 15:51

4 अक्टूबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:29 – 08:02शुभ
काल08:02 – 09:36टालें
शुभ09:36 – 11:10शुभ
रोग11:10 – 12:44टालें
उद्वेग12:44 – 14:18टालें
चर14:18 – 15:51सामान्य
लाभ15:51 – 17:25शुभ
अमृत17:25 – 18:59शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:59 – 20:25सामान्य
रोग20:25 – 21:51टालें
काल21:51 – 23:17टालें
लाभ23:17 – 00:43शुभ
उद्वेग00:43 – 02:09टालें
शुभ02:09 – 03:35शुभ
अमृत03:35 – 05:01शुभ
चर05:01 – 06:27सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:2907:31दिन
शनि07:3108:34दिन
गुरु08:3409:36दिन
मंगल09:3610:39दिन
सूर्य10:3911:41दिन
शुक्र11:4112:44दिन
बुध12:4413:46दिन
चंद्र13:4614:49दिन
शनि14:4915:51दिन
गुरु15:5116:54दिन
मंगल16:5417:57दिन
सूर्य17:5718:59दिन
शुक्र18:5919:56रात
बुध19:5620:54रात
चंद्र20:5421:51रात
शनि21:5122:48रात
गुरु22:4823:46रात
मंगल23:4600:43रात
सूर्य00:4301:41रात
शुक्र01:4102:38रात
बुध02:3803:35रात
चंद्र03:3504:33रात
शनि04:3305:30रात
गुरु05:3006:27रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 अक्टू॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 अक्टू॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 अक्टू॰ 2027आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
18 अक्टू॰ 2027तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 अक्टू॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 अक्टू॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2027कार्तिक अमावस्याअमावस्या
2 नव॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां सिडनी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2448° (लाहिड़ी)। समय सिडनी (Australia/Sydney) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।