24 मार्च 2026 को तिरुवनंतपुरम का पंचांग

मंगलवार, 24 मार्च 2026, तिरुवनंतपुरम, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 24 मार्च 2026 को तिरुवनंतपुरम में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (16:08 तक), नक्षत्र रोहिणी (19:05 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 06:24 पर और सूर्यास्त 18:32 पर है। राहुकाल 15:30 से 17:01 तक है।

दिन और रात
दिन 06:24 – 18:32
रात 06:23 तक
तिथि
षष्ठी, 16:08 तक
सप्तमी
नक्षत्र
रोहिणी, 19:05 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 मार्च 2026 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 16:08 तक
शुक्ल सप्तमी 13:50, 25 मार्च तक
नक्षत्र
रोहिणी 19:05 तक
मृगशिरा 17:33, 25 मार्च तक
योग
प्रीति 09:07 तक
आयुष्मान 06:02, 25 मार्च तक
सौभाग्य 03:09, 26 मार्च तक
करण
तैतिल 16:08 तक
गर 02:57, 25 मार्च तक
वणिज 13:50, 25 मार्च तक
चंद्र राशि
वृषभ 06:17, 25 मार्च तक
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:24
सूर्यास्त
18:32
चंद्रोदय
10:39
चंद्रास्त
23:47
दिनमान
12h 8m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:49 – 05:37
अभिजीत मुहूर्त
12:04 – 12:52

अशुभ समय

राहुकाल
15:30 – 17:01
यमगंड
09:26 – 10:57
गुलिक काल
12:28 – 13:59

24 मार्च 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:24 – 07:55टालें
उद्वेग07:55 – 09:26टालें
चर09:26 – 10:57सामान्य
लाभ10:57 – 12:28शुभ
अमृत12:28 – 13:59शुभ
काल13:59 – 15:30टालें
शुभ15:30 – 17:01शुभ
रोग17:01 – 18:32टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:32 – 20:01टालें
लाभ20:01 – 21:30शुभ
उद्वेग21:30 – 22:59टालें
शुभ22:59 – 00:28शुभ
अमृत00:28 – 01:57शुभ
चर01:57 – 03:26सामान्य
रोग03:26 – 04:55टालें
काल04:55 – 06:23टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:2407:25दिन
सूर्य07:2508:25दिन
शुक्र08:2509:26दिन
बुध09:2610:27दिन
चंद्र10:2711:27दिन
शनि11:2712:28दिन
गुरु12:2813:29दिन
मंगल13:2914:30दिन
सूर्य14:3015:30दिन
शुक्र15:3016:31दिन
बुध16:3117:32दिन
चंद्र17:3218:32दिन
शनि18:3219:32रात
गुरु19:3220:31रात
मंगल20:3121:30रात
सूर्य21:3022:29रात
शुक्र22:2923:29रात
बुध23:2900:28रात
चंद्र00:2801:27रात
शनि01:2702:26रात
गुरु02:2603:26रात
मंगल03:2604:25रात
सूर्य04:2505:24रात
शुक्र05:2406:23रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 मार्च 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 अप्रैल 2026चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
6 अप्रैल 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 अप्रैल 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 अप्रैल 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 अप्रैल 2026मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
15 अप्रैल 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अप्रैल 2026वैशाख अमावस्याअमावस्या
20 अप्रैल 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां तिरुवनंतपुरम में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2234° (लाहिड़ी)। समय तिरुवनंतपुरम (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।