4 अप्रैल 2026 को द्वारका का चौघड़िया

शनिवार, 4 अप्रैल 2026, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 4 अप्रैल 2026 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (10:09 तक), नक्षत्र स्वाति (21:35 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 06:44 पर और सूर्यास्त 19:10 पर है। राहुकाल 09:50 से 11:24 तक है।

दिन और रात
दिन 06:44 – 19:10
रात 06:43 तक
तिथि
द्वितीया, 10:09 तक
तृतीया
नक्षत्र
स्वाति, 21:35 तक
विशाखा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 अप्रैल 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:44 – 08:17टालें
शुभ08:17 – 09:50शुभ
रोग09:50 – 11:24टालें
उद्वेग11:24 – 12:57टालें
चर12:57 – 14:30सामान्य
लाभ14:30 – 16:03शुभ
अमृत16:03 – 17:37शुभ
काल17:37 – 19:10टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ19:10 – 20:36शुभ
उद्वेग20:36 – 22:03टालें
शुभ22:03 – 23:30शुभ
अमृत23:30 – 00:56शुभ
चर00:56 – 02:23सामान्य
रोग02:23 – 03:50टालें
काल03:50 – 05:16टालें
लाभ05:16 – 06:43शुभ

4 अप्रैल 2026 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 10:09 तक
कृष्ण तृतीया 12:00, 5 अप्रैल तक
नक्षत्र
स्वाति 21:35 तक
विशाखा 00:08, 6 अप्रैल तक
योग
हर्षण 14:17 तक
वज्रअशुभ 14:43, 5 अप्रैल तक
करण
गर 10:09 तक
वणिज 23:02 तक
विष्टि (भद्रा) 12:00, 5 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:44
सूर्यास्त
19:10
चंद्रोदय
21:18
चंद्रास्त
07:46
दिनमान
12h 26m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:11 – 05:58
अभिजीत मुहूर्त
12:32 – 13:22

अशुभ समय

राहुकाल
09:50 – 11:24
यमगंड
14:30 – 16:03
गुलिक काल
06:44 – 08:17

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:4407:46दिन
गुरु07:4608:48दिन
मंगल08:4809:50दिन
सूर्य09:5010:52दिन
शुक्र10:5211:55दिन
बुध11:5512:57दिन
चंद्र12:5713:59दिन
शनि13:5915:01दिन
गुरु15:0116:03दिन
मंगल16:0317:05दिन
सूर्य17:0518:08दिन
शुक्र18:0819:10दिन
बुध19:1020:08रात
चंद्र20:0821:05रात
शनि21:0522:03रात
गुरु22:0323:01रात
मंगल23:0123:59रात
सूर्य23:5900:56रात
शुक्र00:5601:54रात
बुध01:5402:52रात
चंद्र02:5203:50रात
शनि03:5004:47रात
गुरु04:4705:45रात
मंगल05:4506:43रात

अयनांश 24.2238° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।