25 नवंबर 2026 को सिलचर का चौघड़िया

बुधवार, 25 नवंबर 2026, सिलचर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 25 नवंबर 2026 को सिलचर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (16:50 तक), नक्षत्र रोहिणी (20:36 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 05:41 पर और सूर्यास्त 16:29 पर है। राहुकाल 11:05 से 12:26 तक है।

दिन और रात
दिन 05:41 – 16:29
रात 05:42 तक
तिथि
प्रतिपदा, 16:50 तक
द्वितीया
नक्षत्र
रोहिणी, 20:36 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 नवंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:41 – 07:02शुभ
अमृत07:02 – 08:23शुभ
काल08:23 – 09:44टालें
शुभ09:44 – 11:05शुभ
रोग11:05 – 12:26टालें
उद्वेग12:26 – 13:47टालें
चर13:47 – 15:08सामान्य
लाभ15:08 – 16:29शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग16:29 – 18:08टालें
शुभ18:08 – 19:47शुभ
अमृत19:47 – 21:26शुभ
चर21:26 – 23:05सामान्य
रोग23:05 – 00:45टालें
काल00:45 – 02:24टालें
लाभ02:24 – 04:03शुभ
उद्वेग04:03 – 05:42टालें

25 नवंबर 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 16:50 तक
कृष्ण द्वितीया 13:15, 26 नव॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 20:36 तक
मृगशिरा 17:47, 26 नव॰ तक
योग
शिव 11:59 तक
सिद्ध 07:49, 26 नव॰ तक
करण
बालव 06:38 तक
कौलव 16:50 तक
तैतिल 03:02, 26 नव॰ तक
गर 13:15, 26 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:41
सूर्यास्त
16:29
चंद्रोदय
17:00
चंद्रास्त
06:19
दिनमान
10h 47m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:56 – 04:49
अभिजीत मुहूर्त
10:44 – 11:27 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:05 – 12:26
यमगंड
07:02 – 08:23
गुलिक काल
09:44 – 11:05

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:4106:35दिन
चंद्र06:3507:29दिन
शनि07:2908:23दिन
गुरु08:2309:17दिन
मंगल09:1710:11दिन
सूर्य10:1111:05दिन
शुक्र11:0511:59दिन
बुध11:5912:53दिन
चंद्र12:5313:47दिन
शनि13:4714:41दिन
गुरु14:4115:35दिन
मंगल15:3516:29दिन
सूर्य16:2917:35रात
शुक्र17:3518:41रात
बुध18:4119:47रात
चंद्र19:4720:53रात
शनि20:5321:59रात
गुरु21:5923:05रात
मंगल23:0500:12रात
सूर्य00:1201:18रात
शुक्र01:1802:24रात
बुध02:2403:30रात
चंद्र03:3004:36रात
शनि04:3605:42रात

अयनांश 24.2328° (लाहिड़ी)। समय सिलचर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।