20 सितंबर 2028 को दोहा का पंचांग

बुधवार, 20 सितंबर 2028, दोहा, Qatar। समय Asia/Qatar में है।

बुधवार, 20 सितंबर 2028 को दोहा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (13:49 तक), नक्षत्र हस्त (06:48 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 05:21 पर और सूर्यास्त 17:32 पर है। राहुकाल 11:26 से 12:58 तक है।

दिन और रात
दिन 05:21 – 17:32
रात 05:22 तक
तिथि
द्वितीया, 13:49 तक
तृतीया
नक्षत्र
चित्रा, 04:08 तक
स्वाति
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 सितंबर 2028 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 13:49 तक
शुक्ल तृतीया 10:30, 21 सित॰ तक
नक्षत्र
हस्त 06:48 तक
चित्रा 04:08, 21 सित॰ तक
स्वाति 01:59, 22 सित॰ तक
योग
ब्रह्म 16:35 तक
इंद्र 12:47, 21 सित॰ तक
करण
कौलव 13:49 तक
तैतिल 00:06, 21 सित॰ तक
गर 10:30, 21 सित॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 17:25 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:21
सूर्यास्त
17:32
चंद्रोदय
06:55
चंद्रास्त
18:29
दिनमान
12h 10m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:47 – 04:34
अभिजीत मुहूर्त
11:02 – 11:51 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:26 – 12:58
यमगंड
06:53 – 08:24
गुलिक काल
09:55 – 11:26

20 सितंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:21 – 06:53शुभ
अमृत06:53 – 08:24शुभ
काल08:24 – 09:55टालें
शुभ09:55 – 11:26शुभ
रोग11:26 – 12:58टालें
उद्वेग12:58 – 14:29टालें
चर14:29 – 16:00सामान्य
लाभ16:00 – 17:32शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:32 – 19:00टालें
शुभ19:00 – 20:29शुभ
अमृत20:29 – 21:58शुभ
चर21:58 – 23:27सामान्य
रोग23:27 – 00:55टालें
काल00:55 – 02:24टालें
लाभ02:24 – 03:53शुभ
उद्वेग03:53 – 05:22टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:2106:22दिन
चंद्र06:2207:23दिन
शनि07:2308:24दिन
गुरु08:2409:25दिन
मंगल09:2510:26दिन
सूर्य10:2611:26दिन
शुक्र11:2612:27दिन
बुध12:2713:28दिन
चंद्र13:2814:29दिन
शनि14:2915:30दिन
गुरु15:3016:31दिन
मंगल16:3117:32दिन
सूर्य17:3218:31रात
शुक्र18:3119:30रात
बुध19:3020:29रात
चंद्र20:2921:28रात
शनि21:2822:27रात
गुरु22:2723:27रात
मंगल23:2700:26रात
सूर्य00:2601:25रात
शुक्र01:2502:24रात
बुध02:2403:23रात
चंद्र03:2304:23रात
शनि04:2305:22रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 सित॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 सित॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 अक्टू॰ 2028आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
7 अक्टू॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 अक्टू॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 अक्टू॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अक्टू॰ 2028तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2028कार्तिक अमावस्याअमावस्या

तिथियां दोहा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2582° (लाहिड़ी)। समय दोहा (Asia/Qatar) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।