17 सितंबर 2025 को डरबन का पंचांग

बुधवार, 17 सितंबर 2025, डरबन, दक्षिण अफ़्रीका। समय Africa/Johannesburg में है।

बुधवार, 17 सितंबर 2025 को डरबन में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (20:10 तक), नक्षत्र पुष्य (03:02, 18 सित॰ तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 05:51 पर और सूर्यास्त 17:49 पर है। राहुकाल 11:50 से 13:20 तक है।

दिन और रात
दिन 05:51 – 17:49
रात 05:50 तक
तिथि
एकादशी, 20:10 तक
द्वादशी
नक्षत्र
पुष्य, 03:02 तक
आश्लेषा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 सितंबर 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 20:10 तक
कृष्ण द्वादशी 19:55, 18 सित॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 03:02, 18 सित॰ तक
आश्लेषा 03:35, 19 सित॰ तक
योग
परिघअशुभ 19:25 तक
शिव 18:07, 18 सित॰ तक
करण
बव 08:27 तक
बालव 20:10 तक
कौलव 07:59, 18 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:51
सूर्यास्त
17:49
चंद्रोदय
03:15
चंद्रास्त
13:39
दिनमान
11h 58m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:15 – 05:03
अभिजीत मुहूर्त
11:26 – 12:14 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:50 – 13:20
यमगंड
07:21 – 08:51
गुलिक काल
10:20 – 11:50

17 सितंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:51 – 07:21शुभ
अमृत07:21 – 08:51शुभ
काल08:51 – 10:20टालें
शुभ10:20 – 11:50शुभ
रोग11:50 – 13:20टालें
उद्वेग13:20 – 14:50टालें
चर14:50 – 16:19सामान्य
लाभ16:19 – 17:49शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:49 – 19:19टालें
शुभ19:19 – 20:49शुभ
अमृत20:49 – 22:19शुभ
चर22:19 – 23:49सामान्य
रोग23:49 – 01:20टालें
काल01:20 – 02:50टालें
लाभ02:50 – 04:20शुभ
उद्वेग04:20 – 05:50टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:5106:51दिन
चंद्र06:5107:51दिन
शनि07:5108:51दिन
गुरु08:5109:50दिन
मंगल09:5010:50दिन
सूर्य10:5011:50दिन
शुक्र11:5012:50दिन
बुध12:5013:50दिन
चंद्र13:5014:50दिन
शनि14:5015:49दिन
गुरु15:4916:49दिन
मंगल16:4917:49दिन
सूर्य17:4918:49रात
शुक्र18:4919:49रात
बुध19:4920:49रात
चंद्र20:4921:49रात
शनि21:4922:49रात
गुरु22:4923:49रात
मंगल23:4900:49रात
सूर्य00:4901:50रात
शुक्र01:5002:50रात
बुध02:5003:50रात
चंद्र03:5004:50रात
शनि04:5005:50रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 सित॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
19 सित॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 सित॰ 2025आश्विन अमावस्याअमावस्या
25 सित॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2025आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
10 अक्टू॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 अक्टू॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां डरबन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2162° (लाहिड़ी)। समय डरबन (Africa/Johannesburg) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।