18 सितंबर 2025 को जयपुर का पंचांग

गुरुवार, 18 सितंबर 2025, जयपुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 18 सितंबर 2025 को जयपुर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (23:25 तक), नक्षत्र पुष्य (06:32 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 06:13 पर और सूर्यास्त 18:27 पर है। राहुकाल 13:52 से 15:24 तक है।

दिन और रात
दिन 06:13 – 18:27
रात 06:14 तक
तिथि
द्वादशी, 23:25 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
आश्लेषा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 सितंबर 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 23:25 तक
कृष्ण त्रयोदशी 23:37, 19 सित॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 06:32 तक
आश्लेषा 07:05, 19 सित॰ तक
योग
शिव 21:37 तक
सिद्ध 20:41, 19 सित॰ तक
करण
कौलव 11:29 तक
तैतिल 23:25 तक
गर 11:27, 19 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:13
सूर्यास्त
18:27
चंद्रोदय
02:42
चंद्रास्त
16:33
दिनमान
12h 14m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:39 – 05:26
अभिजीत मुहूर्त
11:56 – 12:45

अशुभ समय

राहुकाल
13:52 – 15:24
यमगंड
06:13 – 07:45
गुलिक काल
09:17 – 10:48

18 सितंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:13 – 07:45शुभ
रोग07:45 – 09:17टालें
उद्वेग09:17 – 10:48टालें
चर10:48 – 12:20सामान्य
लाभ12:20 – 13:52शुभ
अमृत13:52 – 15:24शुभ
काल15:24 – 16:56टालें
शुभ16:56 – 18:27शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:27 – 19:56शुभ
चर19:56 – 21:24सामान्य
रोग21:24 – 22:52टालें
काल22:52 – 00:20टालें
लाभ00:20 – 01:49शुभ
उद्वेग01:49 – 03:17टालें
शुभ03:17 – 04:45शुभ
अमृत04:45 – 06:14शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:1307:14दिन
मंगल07:1408:16दिन
सूर्य08:1609:17दिन
शुक्र09:1710:18दिन
बुध10:1811:19दिन
चंद्र11:1912:20दिन
शनि12:2013:21दिन
गुरु13:2114:23दिन
मंगल14:2315:24दिन
सूर्य15:2416:25दिन
शुक्र16:2517:26दिन
बुध17:2618:27दिन
चंद्र18:2719:26रात
शनि19:2620:25रात
गुरु20:2521:24रात
मंगल21:2422:23रात
सूर्य22:2323:22रात
शुक्र23:2200:20रात
बुध00:2001:19रात
चंद्र01:1902:18रात
शनि02:1803:17रात
गुरु03:1704:16रात
मंगल04:1605:15रात
सूर्य05:1506:14रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
19 सित॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 सित॰ 2025आश्विन अमावस्याअमावस्या
26 सित॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2025आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
10 अक्टू॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 अक्टू॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अक्टू॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 अक्टू॰ 2025तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश

तिथियां जयपुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2162° (लाहिड़ी)। समय जयपुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।