23 जनवरी 2025 को जूनागढ़ का पंचांग

गुरुवार, 23 जनवरी 2025, जूनागढ़, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 23 जनवरी 2025 को जूनागढ़ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (17:38 तक), नक्षत्र विशाखा (05:08, 24 जन॰ तक) और योग गंड है। सूर्योदय 07:28 पर और सूर्यास्त 18:32 पर है। राहुकाल 14:23 से 15:46 तक है।

दिन और रात
दिन 07:28 – 18:32
रात 07:27 तक
तिथि
नवमी, 17:38 तक
दशमी
नक्षत्र
विशाखा, 05:08 तक
अनुराधा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

23 जनवरी 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण नवमी 17:38 तक
कृष्ण दशमी 19:25, 24 जन॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 05:08, 24 जन॰ तक
अनुराधा 07:07, 25 जन॰ तक
योग
गंडअशुभ 05:06, 24 जन॰ तक
वृद्धि 05:08, 25 जन॰ तक
करण
गर 17:38 तक
वणिज 06:36, 24 जन॰ तक
विष्टि (भद्रा) 19:25, 24 जन॰ तक
चंद्र राशि
तुला 22:32 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:28
सूर्यास्त
18:32
चंद्रोदय
01:51
चंद्रास्त
13:04
दिनमान
11h 4m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:44 – 06:36
अभिजीत मुहूर्त
12:37 – 13:22

अशुभ समय

राहुकाल
14:23 – 15:46
यमगंड
07:28 – 08:51
गुलिक काल
10:14 – 11:37

23 जनवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ07:28 – 08:51शुभ
रोग08:51 – 10:14टालें
उद्वेग10:14 – 11:37टालें
चर11:37 – 13:00सामान्य
लाभ13:00 – 14:23शुभ
अमृत14:23 – 15:46शुभ
काल15:46 – 17:09टालें
शुभ17:09 – 18:32शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:32 – 20:09शुभ
चर20:09 – 21:46सामान्य
रोग21:46 – 23:23टालें
काल23:23 – 00:59टालें
लाभ00:59 – 02:36शुभ
उद्वेग02:36 – 04:13टालें
शुभ04:13 – 05:50शुभ
अमृत05:50 – 07:27शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु07:2808:23दिन
मंगल08:2309:18दिन
सूर्य09:1810:14दिन
शुक्र10:1411:09दिन
बुध11:0912:04दिन
चंद्र12:0413:00दिन
शनि13:0013:55दिन
गुरु13:5514:50दिन
मंगल14:5015:46दिन
सूर्य15:4616:41दिन
शुक्र16:4117:36दिन
बुध17:3618:32दिन
चंद्र18:3219:36रात
शनि19:3620:41रात
गुरु20:4121:46रात
मंगल21:4622:50रात
सूर्य22:5023:55रात
शुक्र23:5500:59रात
बुध00:5902:04रात
चंद्र02:0403:09रात
शनि03:0904:13रात
गुरु04:1305:18रात
मंगल05:1806:23रात
सूर्य06:2307:27रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
25 जन॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 जन॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 जन॰ 2025माघ अमावस्याअमावस्या
2 फ़र॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 फ़र॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2025माघ पूर्णिमापूर्णिमा
12 फ़र॰ 2025कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
16 फ़र॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 फ़र॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां जूनागढ़ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2071° (लाहिड़ी)। समय जूनागढ़ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।