13 अक्टूबर 2026 को कुवैत सिटी का पंचांग

मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026, कुवैत सिटी, Kuwait। समय Asia/Kuwait में है।

मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को कुवैत सिटी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (20:58 तक), नक्षत्र विशाखा (23:13 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 05:48 पर और सूर्यास्त 17:20 पर है। राहुकाल 14:27 से 15:53 तक है।

दिन और रात
दिन 05:48 – 17:20
रात 05:48 तक
तिथि
तृतीया, 20:58 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
विशाखा, 23:13 तक
अनुराधा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 20:58 तक
शुक्ल चतुर्थी 22:43, 14 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
विशाखा 23:13 तक
अनुराधा 01:33, 15 अक्टू॰ तक
योग
प्रीति 17:53 तक
आयुष्मान 18:09, 14 अक्टू॰ तक
करण
तैतिल 08:16 तक
गर 20:58 तक
वणिज 09:47, 14 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
तुला 16:42 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:48
सूर्यास्त
17:20
चंद्रोदय
08:19
चंद्रास्त
18:47
दिनमान
11h 32m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:08 – 04:58
अभिजीत मुहूर्त
11:11 – 11:57

अशुभ समय

राहुकाल
14:27 – 15:53
यमगंड
08:41 – 10:07
गुलिक काल
11:34 – 13:00

13 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:48 – 07:14टालें
उद्वेग07:14 – 08:41टालें
चर08:41 – 10:07सामान्य
लाभ10:07 – 11:34शुभ
अमृत11:34 – 13:00शुभ
काल13:00 – 14:27टालें
शुभ14:27 – 15:53शुभ
रोग15:53 – 17:20टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:20 – 18:53टालें
लाभ18:53 – 20:27शुभ
उद्वेग20:27 – 22:00टालें
शुभ22:00 – 23:34शुभ
अमृत23:34 – 01:08शुभ
चर01:08 – 02:41सामान्य
रोग02:41 – 04:15टालें
काल04:15 – 05:48टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:4806:45दिन
सूर्य06:4507:43दिन
शुक्र07:4308:41दिन
बुध08:4109:38दिन
चंद्र09:3810:36दिन
शनि10:3611:34दिन
गुरु11:3412:31दिन
मंगल12:3113:29दिन
सूर्य13:2914:27दिन
शुक्र14:2715:24दिन
बुध15:2416:22दिन
चंद्र16:2217:20दिन
शनि17:2018:22रात
गुरु18:2219:24रात
मंगल19:2420:27रात
सूर्य20:2721:29रात
शुक्र21:2922:32रात
बुध22:3223:34रात
चंद्र23:3400:36रात
शनि00:3601:39रात
गुरु01:3902:41रात
मंगल02:4103:43रात
सूर्य03:4304:46रात
शुक्र04:4605:48रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 अक्टू॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
22 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
29 अक्टू॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 नव॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 नव॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 नव॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 नव॰ 2026कार्तिक अमावस्याअमावस्या

तिथियां कुवैत सिटी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2312° (लाहिड़ी)। समय कुवैत सिटी (Asia/Kuwait) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।