14 अगस्त 2029 को लंदन का पंचांग

मंगलवार, 14 अगस्त 2029, लंदन, यूनाइटेड किंगडम। समय Europe/London में है।

मंगलवार, 14 अगस्त 2029 को लंदन में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (13:51 तक), नक्षत्र हस्त (06:32 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 05:44 पर और सूर्यास्त 20:24 पर है। राहुकाल 16:44 से 18:34 तक है।

दिन और रात
दिन 05:44 – 20:24
रात 05:46 तक
तिथि
पंचमी, 13:51 तक
षष्ठी
नक्षत्र
चित्रा, 04:42 तक
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 अगस्त 2029 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 13:51 तक
शुक्ल षष्ठी 11:17, 15 अग॰ तक
नक्षत्र
हस्त 06:32 तक
चित्रा 04:42, 15 अग॰ तक
स्वाति 03:05, 16 अग॰ तक
योग
साध्य 10:29 तक
शुभ 07:17, 15 अग॰ तक
करण
बालव 13:51 तक
कौलव 00:32, 15 अग॰ तक
तैतिल 11:17, 15 अग॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 17:35 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:44
सूर्यास्त
20:24
चंद्रोदय
11:43
चंद्रास्त
21:40
दिनमान
14h 40m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:30 – 05:07
अभिजीत मुहूर्त
12:35 – 13:33

अशुभ समय

राहुकाल
16:44 – 18:34
यमगंड
09:24 – 11:14
गुलिक काल
13:04 – 14:54

14 अगस्त 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:44 – 07:34टालें
उद्वेग07:34 – 09:24टालें
चर09:24 – 11:14सामान्य
लाभ11:14 – 13:04शुभ
अमृत13:04 – 14:54शुभ
काल14:54 – 16:44टालें
शुभ16:44 – 18:34शुभ
रोग18:34 – 20:24टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल20:24 – 21:34टालें
लाभ21:34 – 22:44शुभ
उद्वेग22:44 – 23:55टालें
शुभ23:55 – 01:05शुभ
अमृत01:05 – 02:15शुभ
चर02:15 – 03:25सामान्य
रोग03:25 – 04:36टालें
काल04:36 – 05:46टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:4406:58दिन
सूर्य06:5808:11दिन
शुक्र08:1109:24दिन
बुध09:2410:37दिन
चंद्र10:3711:51दिन
शनि11:5113:04दिन
गुरु13:0414:17दिन
मंगल14:1715:31दिन
सूर्य15:3116:44दिन
शुक्र16:4417:57दिन
बुध17:5719:11दिन
चंद्र19:1120:24दिन
शनि20:2421:11रात
गुरु21:1121:58रात
मंगल21:5822:44रात
सूर्य22:4423:31रात
शुक्र23:3100:18रात
बुध00:1801:05रात
चंद्र01:0501:52रात
शनि01:5202:39रात
गुरु02:3903:25रात
मंगल03:2504:12रात
सूर्य04:1204:59रात
शुक्र04:5905:46रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 अग॰ 2029सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
19 अग॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
21 अग॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
23 अग॰ 2029श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
28 अग॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 सित॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 सित॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 सित॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 सित॰ 2029भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
11 सित॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां लंदन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2708° (लाहिड़ी)। समय लंदन (Europe/London) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।