18 अगस्त 2001 को नई दिल्ली का पंचांग

शनिवार, 18 अगस्त 2001, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 18 अगस्त 2001 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (12:15 तक), नक्षत्र पुष्य (07:44 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 05:51 पर और सूर्यास्त 18:57 पर है। राहुकाल 09:08 से 10:46 तक है।

दिन और रात
दिन 05:51 – 18:57
रात 05:52 तक
तिथि
चतुर्दशी, 12:15 तक
अमावस्या
नक्षत्र
आश्लेषा, 04:45 तक
मघा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 अगस्त 2001 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 12:15 तक
अमावस्या 08:25, 19 अग॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 07:44 तक
आश्लेषा 04:45, 19 अग॰ तक
मघा 01:41, 20 अग॰ तक
योग
वरीयान 01:31, 19 अग॰ तक
परिघअशुभ 21:13, 19 अग॰ तक
करण
शकुनि 12:15 तक
चतुष्पद 22:21 तक
नाग 08:25, 19 अग॰ तक
चंद्र राशि
कर्क 04:45, 19 अग॰ तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:51
सूर्यास्त
18:57
चंद्रोदय
04:35
चंद्रास्त
18:39
दिनमान
13h 6m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2058
शक संवत
1923, वृष संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:24 – 05:08
अभिजीत मुहूर्त
11:58 – 12:51

अशुभ समय

राहुकाल
09:08 – 10:46
यमगंड
14:03 – 15:41
गुलिक काल
05:51 – 07:30

18 अगस्त 2001 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:51 – 07:30टालें
शुभ07:30 – 09:08शुभ
रोग09:08 – 10:46टालें
उद्वेग10:46 – 12:24टालें
चर12:24 – 14:03सामान्य
लाभ14:03 – 15:41शुभ
अमृत15:41 – 17:19शुभ
काल17:19 – 18:57टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:57 – 20:19शुभ
उद्वेग20:19 – 21:41टालें
शुभ21:41 – 23:03शुभ
अमृत23:03 – 00:25शुभ
चर00:25 – 01:46सामान्य
रोग01:46 – 03:08टालें
काल03:08 – 04:30टालें
लाभ04:30 – 05:52शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:5106:57दिन
गुरु06:5708:02दिन
मंगल08:0209:08दिन
सूर्य09:0810:13दिन
शुक्र10:1311:19दिन
बुध11:1912:24दिन
चंद्र12:2413:30दिन
शनि13:3014:35दिन
गुरु14:3515:41दिन
मंगल15:4116:46दिन
सूर्य16:4617:52दिन
शुक्र17:5218:57दिन
बुध18:5719:52रात
चंद्र19:5220:46रात
शनि20:4621:41रात
गुरु21:4122:35रात
मंगल22:3523:30रात
सूर्य23:3000:25रात
शुक्र00:2501:19रात
बुध01:1902:14रात
चंद्र02:1403:08रात
शनि03:0804:03रात
गुरु04:0304:57रात
मंगल04:5705:52रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
19 अग॰ 2001भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
22 अग॰ 2001विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 अग॰ 2001शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 अग॰ 2001प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 सित॰ 2001भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
7 सित॰ 2001संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 सित॰ 2001कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 सित॰ 2001कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 सित॰ 2001प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 सित॰ 2001कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8798° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।