6 मार्च 2044 को नई दिल्ली का पंचांग

रविवार, 6 मार्च 2044, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 6 मार्च 2044 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (15:52 तक), नक्षत्र रोहिणी (04:14, 7 मार्च तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 06:40 पर और सूर्यास्त 18:24 पर है। राहुकाल 16:56 से 18:24 तक है।

दिन और रात
दिन 06:40 – 18:24
रात 06:39 तक
तिथि
सप्तमी, 15:52 तक
अष्टमी
नक्षत्र
रोहिणी, 04:14 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 मार्च 2044 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 15:52 तक
शुक्ल अष्टमी 13:41, 7 मार्च तक
नक्षत्र
रोहिणी 04:14, 7 मार्च तक
मृगशिरा 02:44, 8 मार्च तक
योग
विष्कंभअशुभ 00:13, 7 मार्च तक
प्रीति 21:15, 7 मार्च तक
करण
वणिज 15:52 तक
विष्टि (भद्रा) 02:47, 7 मार्च तक
बव 13:41, 7 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:40
सूर्यास्त
18:24
चंद्रोदय
10:38
चंद्रास्त
00:15
दिनमान
11h 44m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2100
शक संवत
1965, रुधिरोद्गारी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:02 – 05:51
अभिजीत मुहूर्त
12:09 – 12:55

अशुभ समय

राहुकाल
16:56 – 18:24
यमगंड
12:32 – 14:00
गुलिक काल
15:28 – 16:56

6 मार्च 2044 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:40 – 08:08टालें
चर08:08 – 09:36सामान्य
लाभ09:36 – 11:04शुभ
अमृत11:04 – 12:32शुभ
काल12:32 – 14:00टालें
शुभ14:00 – 15:28शुभ
रोग15:28 – 16:56टालें
उद्वेग16:56 – 18:24टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:24 – 19:56शुभ
अमृत19:56 – 21:28शुभ
चर21:28 – 23:00सामान्य
रोग23:00 – 00:31टालें
काल00:31 – 02:03टालें
लाभ02:03 – 03:35शुभ
उद्वेग03:35 – 05:07टालें
शुभ05:07 – 06:39शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:4007:39दिन
शुक्र07:3908:37दिन
बुध08:3709:36दिन
चंद्र09:3610:35दिन
शनि10:3511:33दिन
गुरु11:3312:32दिन
मंगल12:3213:31दिन
सूर्य13:3114:29दिन
शुक्र14:2915:28दिन
बुध15:2816:27दिन
चंद्र16:2717:25दिन
शनि17:2518:24दिन
गुरु18:2419:25रात
मंगल19:2520:26रात
सूर्य20:2621:28रात
शुक्र21:2822:29रात
बुध22:2923:30रात
चंद्र23:3000:31रात
शनि00:3101:33रात
गुरु01:3302:34रात
मंगल02:3403:35रात
सूर्य03:3504:36रात
शुक्र04:3605:38रात
बुध05:3806:39रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 मार्च 2044शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 मार्च 2044प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 मार्च 2044फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
14 मार्च 2044मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
17 मार्च 2044संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 मार्च 2044कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 मार्च 2044कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 मार्च 2044प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 मार्च 2044चैत्र अमावस्याअमावस्या
1 अप्रैल 2044विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4742° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।