21 सितंबर 2066 को नई दिल्ली का पंचांग

मंगलवार, 21 सितंबर 2066, नई दिल्ली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 21 सितंबर 2066 को नई दिल्ली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (17:33 तक), नक्षत्र हस्त (09:14 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 06:09 पर और सूर्यास्त 18:18 पर है। राहुकाल 15:16 से 16:47 तक है।

दिन और रात
दिन 06:09 – 18:18
रात 06:09 तक
तिथि
द्वितीया, 17:33 तक
तृतीया
नक्षत्र
हस्त, 09:14 तक
चित्रा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 सितंबर 2066 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 17:33 तक
शुक्ल तृतीया 16:09, 22 सित॰ तक
नक्षत्र
हस्त 09:14 तक
चित्रा 08:39, 22 सित॰ तक
योग
ब्रह्म 19:35 तक
इंद्र 17:20, 22 सित॰ तक
करण
कौलव 17:33 तक
तैतिल 04:53, 22 सित॰ तक
गर 16:09, 22 सित॰ तक
चंद्र राशि
कन्या 20:59 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:09
सूर्यास्त
18:18
चंद्रोदय
07:41
चंद्रास्त
19:07
दिनमान
12h 10m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2123
शक संवत
1988, व्यय संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:34 – 05:21
अभिजीत मुहूर्त
11:49 – 12:38

अशुभ समय

राहुकाल
15:16 – 16:47
यमगंड
09:11 – 10:42
गुलिक काल
12:14 – 13:45

21 सितंबर 2066 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:09 – 07:40टालें
उद्वेग07:40 – 09:11टालें
चर09:11 – 10:42सामान्य
लाभ10:42 – 12:14शुभ
अमृत12:14 – 13:45शुभ
काल13:45 – 15:16टालें
शुभ15:16 – 16:47शुभ
रोग16:47 – 18:18टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:18 – 19:47टालें
लाभ19:47 – 21:16शुभ
उद्वेग21:16 – 22:45टालें
शुभ22:45 – 00:14शुभ
अमृत00:14 – 01:43शुभ
चर01:43 – 03:11सामान्य
रोग03:11 – 04:40टालें
काल04:40 – 06:09टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:0907:09दिन
सूर्य07:0908:10दिन
शुक्र08:1009:11दिन
बुध09:1110:12दिन
चंद्र10:1211:13दिन
शनि11:1312:14दिन
गुरु12:1413:14दिन
मंगल13:1414:15दिन
सूर्य14:1515:16दिन
शुक्र15:1616:17दिन
बुध16:1717:18दिन
चंद्र17:1818:18दिन
शनि18:1819:18रात
गुरु19:1820:17रात
मंगल20:1721:16रात
सूर्य21:1622:15रात
शुक्र22:1523:15रात
बुध23:1500:14रात
चंद्र00:1401:13रात
शनि01:1302:12रात
गुरु02:1203:11रात
मंगल03:1104:11रात
सूर्य04:1105:10रात
शुक्र05:1006:09रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
23 सित॰ 2066विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 सित॰ 2066शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 अक्टू॰ 2066प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 अक्टू॰ 2066आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
7 अक्टू॰ 2066संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 अक्टू॰ 2066कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 अक्टू॰ 2066कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 अक्टू॰ 2066प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 अक्टू॰ 2066तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2066कार्तिक अमावस्याअमावस्या

तिथियां नई दिल्ली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.7892° (लाहिड़ी)। समय नई दिल्ली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।