4 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क का पंचांग

शुक्रवार, 4 सितंबर 2026, न्यूयॉर्क, संयुक्त राज्य। समय America/New_York में है।

शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (14:44 तक), नक्षत्र रोहिणी (13:34 तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 06:26 पर और सूर्यास्त 19:23 पर है। राहुकाल 11:17 से 12:54 तक है।

दिन और रात
दिन 06:26 – 19:23
रात 06:27 तक
तिथि
अष्टमी, 14:44 तक
नवमी
नक्षत्र
रोहिणी, 13:34 तक
मृगशिरा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 सितंबर 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 14:44 तक
कृष्ण नवमी 12:24, 5 सित॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 13:34 तक
मृगशिरा 12:01, 5 सित॰ तक
योग
वज्रअशुभ 03:17, 5 सित॰ तक
सिद्धि 00:15, 6 सित॰ तक
करण
कौलव 14:44 तक
तैतिल 01:34, 5 सित॰ तक
गर 12:24, 5 सित॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 00:48, 5 सित॰ तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:26
सूर्यास्त
19:23
चंद्रोदय
23:41
चंद्रास्त
14:55
दिनमान
12h 57m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:57 – 05:41
अभिजीत मुहूर्त
12:28 – 13:20

अशुभ समय

राहुकाल
11:17 – 12:54
यमगंड
16:08 – 17:46
गुलिक काल
08:03 – 09:40

4 सितंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:26 – 08:03सामान्य
लाभ08:03 – 09:40शुभ
अमृत09:40 – 11:17शुभ
काल11:17 – 12:54टालें
शुभ12:54 – 14:31शुभ
रोग14:31 – 16:08टालें
उद्वेग16:08 – 17:46टालें
चर17:46 – 19:23सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:23 – 20:46टालें
काल20:46 – 22:09टालें
लाभ22:09 – 23:32शुभ
उद्वेग23:32 – 00:55टालें
शुभ00:55 – 02:18शुभ
अमृत02:18 – 03:41शुभ
चर03:41 – 05:04सामान्य
रोग05:04 – 06:27टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:2607:30दिन
बुध07:3008:35दिन
चंद्र08:3509:40दिन
शनि09:4010:45दिन
गुरु10:4511:49दिन
मंगल11:4912:54दिन
सूर्य12:5413:59दिन
शुक्र13:5915:04दिन
बुध15:0416:08दिन
चंद्र16:0817:13दिन
शनि17:1318:18दिन
गुरु18:1819:23दिन
मंगल19:2320:18रात
सूर्य20:1821:13रात
शुक्र21:1322:09रात
बुध22:0923:04रात
चंद्र23:0423:59रात
शनि23:5900:55रात
गुरु00:5501:50रात
मंगल01:5002:45रात
सूर्य02:4503:41रात
शुक्र03:4104:36रात
बुध04:3605:31रात
चंद्र05:3106:27रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 सित॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 सित॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 सित॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 सित॰ 2026भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
14 सित॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 सित॰ 2026कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
22 सित॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 सित॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 सित॰ 2026भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
29 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां न्यूयॉर्क में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2297° (लाहिड़ी)। समय न्यूयॉर्क (America/New_York) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।